आर्ट का पुल – फ़हीम आज़मी

पहले तो सारा इलाका एक ही था और उसका नाम भी एक ही था। इलाका बहुत उपजाऊ था। बहुत से बाग, खेत, जंगली पौधे, फूल और झाडियाँ सारे क्षेत्र में फैली हुयीं थीं। इसइलाके के वासियों को अपने जीवन की आवश्यकताएँ जुटाने के लिये किसी और इलाके पर आश्रित नहीं होना पडता था।खेतों से अनाज, … पढ़ना जारी रखें आर्ट का पुल – फ़हीम आज़मी

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जल-प्रांतर – अरुण प्रकाश

Arun Prakash Story in Hindi

दूर से मंदिर दिखाई देता था।   चारों तरफ फैले अछोर पानी के बीच घिरा शिव मंदिर। पानी इतना गहरा था कि हवा के थपेड़े से लहरें भी कम ही उठ पाती थीं। हवा पूरी तेजी से फेंके गए गेंद की तरह आती और पानी की सतह सहलाती आगे बढ़ जाती। पानी का किनारा धुँधला … पढ़ना जारी रखें जल-प्रांतर – अरुण प्रकाश

सियाह हाशिए – सआदत हसन मंटो

Story by Saadat Ali Hasan Manto

करामात   लूटा हुआ माल बरामद करने के लिए पुलिस ने छापे मारने शुरू किए। लोग डर के मारे लूटा हुआ माल रात के अँधेरे में बाहर फेंकने लगे; कुछ ऐसे भी थे जिन्होंने अपना माल भी मौका पाकर अपने से अलहदा कर दिया, कानूनी गिरफ्त से बचे रहें। एक आदमी को बहुत दिक्कत पेश … पढ़ना जारी रखें सियाह हाशिए – सआदत हसन मंटो

एक थी गौरा – अमरकांत

लंबे कद और डबलंग चेहरे वाले चाचा रामशरण के लाख विरोध के बावजूद आशू का विवाह वहीं हुआ। उन्होंने तो बहुत पहले ही ऐलान कर दिया था कि 'लड़की बड़ी बेहया है।'   आशू एक व्यवहार-कुशल आदर्शवादी नौजवान है, जिस पर मार्क्स और गाँधी दोनों का गहरा प्रभाव है। वह स्वभाव से शर्मीला या संकोची … पढ़ना जारी रखें एक थी गौरा – अमरकांत

ग्यारह सितंबर के बाद – अनवर सुहैल

ग्यारह सितंबर के बाद करीमपुरा में एक ही दिन, एक साथ दो बातें ऐसी हुर्इं, जिससे चिपकू तिवारी जैसे लोगों को बतकही का मसाला मिल गया। अव्वल तो ये कि हनीफ ने अपनी खास मियाँकट दाढ़ी कटवा ली। दूजा स्कूप अहमद ने जुटा दिया... जाने उसे क्या हुआ कि वह दँतनिपोरी छोड़ पक्का नमाजी बन … पढ़ना जारी रखें ग्यारह सितंबर के बाद – अनवर सुहैल

कुंजड़-कसाई : अनवर सुहैल

'कुंजड़-कसाइयों को तमीज कहाँ... तमीज का ठेका तो तुम्हारे सैयदों ने जो ले रक्खा है?' मुहम्मद लतीफ कुरैशी उर्फ एम एल कुरैशी बहुत कम बोला करते। कभी बोलते भी तो कफन फाड़कर बोलते। ऐसे कि सामने वाला खून के घूँट पीकर रह जाए। जुलेखा ने घूर कर उन्हें देखा। हर कड़वी बात उगलने से पहले … पढ़ना जारी रखें कुंजड़-कसाई : अनवर सुहैल

जयदोल – सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’

लेफ्टिनेंट सागर ने अपना कीचड़ से सना चमड़े का दस्ताना उतार कर, ट्रक के दरवाजे पर पटकते हुए कहा,''गुरूंग, तुम गाड़ी के साथ ठहरो, हम कुछ बन्दोबस्त करेगा।'' गुरूंग सड़ाक से जूतों की एड़ियाँ चटका कर बोला,''ठीक ए सा'ब -'' साँझ हो रही थी। तीन दिन मूसलाधार बारिश के कारण नवगाँव में रुके रहने के … पढ़ना जारी रखें जयदोल – सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’