सिवान से पटना – विनय मूर्ति शर्मा

बात कितनी चले, वजन के लिए घटना जरुरी है। चीज चमकदार सही, कीमत के लिए बिकना जरूरी है। आया तूफ़ां तो लगा इक बारगी सब साफ होगा अब। गर्द ओ गुबार मगर,सच के लिए हटना जरूरी है।। है जंगलराज तभी 'सीवान'पर हैवान हावी है। जुल्म ओ कानून की, खाई के लिए 'पटना'जरुरी है।।

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छोटी औरत – चंद्र रेखा ढडवाल

क़दमताल करती है औरत कभी तेज़ कभी धीमे जैसी बजती है धुन नाचती है उसपर कभी हँस कर कभी रो कर पाँवों को एक क्रम से उठाने-बिठाने के उसके बेढब प्रयासों को देखते उससे बड़ी उम्र की एक औरत मुँह बिचकाती है उसके पल्लू को अँगुली से लिपेटती साथ-साथ ठुमकती है घर की एक छोटी... Continue Reading →

वे रात भर अन्त की – उदयन वाजपेयी

वे रात भर अन्त की प्रतीक्षा करते रहे जो घुप्प आकाश के एक अदृश्य कोने में पड़ा सोता रहा रात भर उसने मुझे कन्धे हिलाकर जगाया, बोली धीरे से मेरे पंख ! मेरे पंख !! नींद में चलते मैंने वे चुपचाप उसके हाथों में रख दिए जैसे वह उन हाथों से गुसलख़ाने से भूले हुए कपड़े माँग... Continue Reading →

शिवा -पंकज त्रिवेदी

खड़ा गिरिवर गंभीरा गहन गुहा बस अँधेरा निज दर्शन में अधीरा पलपल बनता है धीरा सूक्ष्म सकल तव शिवा - नाम : पंकज त्रिवेदी ईमेल : vishwagatha@gmail.com आवासीय पता : संपादक -विश्वगाथा गोकुल पार्क सोसाइटी, ८० फीट रोड, सुरेंद्रनगर-३६३००२ गुजरात माता का नाम : शशिकला पिता का नाम : अमृत लाल

उषा की लाली; पूर्णिमा; परदेशी – नाम : डॉ महेन्द्र प्रताप पाण्डेय ‘नन्द’

उषा की लाली रवि रजनी का मिलन मिटा, मिट गयी क्षितिज काली रेखा। परकीया निज प्रिय संग लखिके, छिटकी ऊषा की लाली।।1।। दहने लगा प्रबल इष्र्यानल, झुलसी हिय की हरियाली। नैन बरसने लगे वदन पर, मोती सी सीकर माली।।2।। प्रिया प्रीति विपरीत रीति से, द्विज व्याकुल चिन्ताशाली। स्व सर्वस्व स्वकीया अर्पी, सरस प्रणय नव नय... Continue Reading →

भाई की चिठ्ठी-एकांत श्रीवास्तव

हर पंक्ति जैसे फूलों की क्यारी है जिसमें छुपे काँटों को वह नहीं जानता वह नहीं जानता कि दो शब्दों के बीच भयंकर साँपों की फुँफकार है और डोल रही है वहाँ यम की परछाईं उसने लिखी होगी यह चिट्ठी धानी धूप में हेमंत की यह जाने बिना कि जब यह पहुँचेगी गंतव्य तक भद्रा... Continue Reading →

भारत ज़मीन का टुकड़ा नहीं-अटल बिहारी वाजपेयी

भारत जमीन का टुकड़ा नहीं, जीता जागता राष्ट्रपुरुष है। हिमालय मस्तक है, कश्मीर किरीट है, पंजाब और बंगाल दो विशाल कंधे हैं। पूर्वी और पश्चिमी घाट दो विशाल जंघायें हैं। कन्याकुमारी इसके चरण हैं, सागर इसके पग पखारता है। यह चन्दन की भूमि है, अभिनन्दन की भूमि है, यह तर्पण की भूमि है, यह अर्पण... Continue Reading →

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