बढ़े चलो -बढ़े चलो

बढ़े चलो -बढ़े चलो ! प्रचंड वेग से चलो , अनन्त जिगीषा लिए सत्य पे अड़े चलो ! गजारि सी दहाड़ से सिंहनाद घोर कर, दंभ कीर्ण कूट -कर सूर से बढ़े चलो !! न चाटुकारिता सहो न अपचार को सहो, न अर्थना करो यहाँ स्वम् ही खड़े चलो ! ओर छोर तक कदन न्याय … पढ़ना जारी रखें बढ़े चलो -बढ़े चलो

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सिवान से पटना – विनय मूर्ति शर्मा

Shahabuddin Vs Rajdev Journalist

बात कितनी चले, वजन के लिए घटना जरुरी है। चीज चमकदार सही, कीमत के लिए बिकना जरूरी है। आया तूफ़ां तो लगा इक बारगी सब साफ होगा अब। गर्द ओ गुबार मगर,सच के लिए हटना जरूरी है।। है जंगलराज तभी 'सीवान'पर हैवान हावी है। जुल्म ओ कानून की, खाई के लिए 'पटना'जरुरी है।।

हम किसी से कम नही – मनीषा जाजोरिया

हम किसी से कम नही

न जाने कैसा हुआ ये समां वो कैसे आया एक झोंका हवा का दिल तोड़ गया सारे अरमानों का पिघला गया बने हुए खरे सोने को कर गया उनका मोल रिश्तो से

छोटी औरत – चंद्र रेखा ढडवाल

क़दमताल करती है औरत कभी तेज़ कभी धीमे जैसी बजती है धुन नाचती है उसपर कभी हँस कर कभी रो कर पाँवों को एक क्रम से उठाने-बिठाने के उसके बेढब प्रयासों को देखते उससे बड़ी उम्र की एक औरत मुँह बिचकाती है उसके पल्लू को अँगुली से लिपेटती साथ-साथ ठुमकती है घर की एक छोटी … पढ़ना जारी रखें छोटी औरत – चंद्र रेखा ढडवाल

वे रात भर अन्त की – उदयन वाजपेयी

वे रात भर अन्त की प्रतीक्षा करते रहे जो घुप्प आकाश के एक अदृश्य कोने में पड़ा सोता रहा रात भर उसने मुझे कन्धे हिलाकर जगाया, बोली धीरे से मेरे पंख ! मेरे पंख !! नींद में चलते मैंने वे चुपचाप उसके हाथों में रख दिए जैसे वह उन हाथों से गुसलख़ाने से भूले हुए कपड़े माँग … पढ़ना जारी रखें वे रात भर अन्त की – उदयन वाजपेयी

शिवा -पंकज त्रिवेदी

खड़ा गिरिवर गंभीरा गहन गुहा बस अँधेरा निज दर्शन में अधीरा पलपल बनता है धीरा सूक्ष्म सकल तव शिवा - नाम : पंकज त्रिवेदी ईमेल : vishwagatha@gmail.com आवासीय पता : संपादक -विश्वगाथा गोकुल पार्क सोसाइटी, ८० फीट रोड, सुरेंद्रनगर-३६३००२ गुजरात माता का नाम : शशिकला पिता का नाम : अमृत लाल

उषा की लाली; पूर्णिमा; परदेशी – नाम : डॉ महेन्द्र प्रताप पाण्डेय ‘नन्द’

उषा की लाली रवि रजनी का मिलन मिटा, मिट गयी क्षितिज काली रेखा। परकीया निज प्रिय संग लखिके, छिटकी ऊषा की लाली।।1।। दहने लगा प्रबल इष्र्यानल, झुलसी हिय की हरियाली। नैन बरसने लगे वदन पर, मोती सी सीकर माली।।2।। प्रिया प्रीति विपरीत रीति से, द्विज व्याकुल चिन्ताशाली। स्व सर्वस्व स्वकीया अर्पी, सरस प्रणय नव नय … पढ़ना जारी रखें उषा की लाली; पूर्णिमा; परदेशी – नाम : डॉ महेन्द्र प्रताप पाण्डेय ‘नन्द’