किसी दिन मुझको ही सपनों का ये घर मार डालेगा

किसी दिन मुझको ही सपनों का ये घर मार डालेगा। मेरी ख्वाबों की दुनिया को ये लश्कर मार डालेगा।। भिखारी आज इक़ फुटपाथ पे देखा ठिठुरता है। यकीनन आज फिर मुझको ये बिस्तर मार डालेगा।। खिलौना मानकर ये खेलता फिर जानवर से है। इसी वहशत में जाने कितने बंदर मार डालेगा।। उसे मैं इसलिये ही खत नहीं हूँ भेजता कोई। मेरा खत फाड़कर के वो … पढ़ना जारी रखें किसी दिन मुझको ही सपनों का ये घर मार डालेगा

एक मजदूरन!

कर्म में अरुणोदय से  लीन । वस्त्र धारें हैं जीर्ण, मलीन  । बदन उसका है आभाहीन  । क्षुधा की पूर्ति मात्र है धर्म । न जाने दर्प न माने शर्म । तनिक प्रारब्ध, कठिन है कर्म । नही कोई है अपना ठौर । बनेगा कार्यस्थल कल और । अथक औ अंतहीन यह दौर झेलती नन्ही संतति साथ । पंक से सने युगल लघु हाथ । … पढ़ना जारी रखें एक मजदूरन!

स्वतंत्रता संग्राम के दस्तावेज थे पं. रामविलास

जासं, घोसी (मऊ) : मऊ एवं आजमगढ़ संयुक्त जनपद के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों में पं. रामविलास पांडेय का नाम बेहद अदब से लिया जाता है। आज से ठीक छह वर्ष पूर्व अंतिम सांस लेने वाले पं. रामविलास पांडेय बचपन से ही स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े। मां-पिता के इस इकलौते पुत्र ने भारत मां को ही जननी का दर्जा देना श्रेयस्कर समझा। अंग्रेज जेलर पर … पढ़ना जारी रखें स्वतंत्रता संग्राम के दस्तावेज थे पं. रामविलास

गाँव – धीरज राणा भायला

वो पगडंडी तालाब किनारे की वे शाम धुँधल की गाँव चौबारे की। जहाँ शर्म हया पर्दे की शोभा थी अब याद कहाँ दीवारें वे मिट्टी और गारे की। रोटी थी और मक्खन था और छाछ का लोटा था। नहीं भेदभाव था धन-दौलत का न प्रेम का टोटा था। जल और हवा और मिट्टी भी तब आवाज़ पुकारे थी। वो पगडंडी तालाब किनारे की। अगर आप … पढ़ना जारी रखें गाँव – धीरज राणा भायला

बाढ़ से निपटना तो हमें सीखना ही होगा

पूरब में असम, पश्चिम में गुजरात और दक्षिण में कर्नाटक तक बाढ़ का प्रकोप जारी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्लोबल वॉर्मिंग से वर्षा की कुल मात्रा पूर्ववत रहेगी पर बारिश के पैटर्न में बदलाव आएगा। गर्म हवा में पानी धारण करने की शक्ति अधिक होती है। गर्म बादल बरसते है तो ताबड़तोड़ ज्यादा पानी गिरता है, लेकिन फिर सूखा पड़ जाता है। जैसे … पढ़ना जारी रखें बाढ़ से निपटना तो हमें सीखना ही होगा

आख़िर क्यों सरकारी स्कूल के इस बच्चे के शर्ट में लटकाया गया ताला?

यूपी के एक सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले एक छात्र की एक तस्वीर इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। वायरल हो रही इस तस्वीर को देखने के बाद शायद आपको हंसी आ जाए लेकिन जब आप इस तस्वीर की सच्चाई जानेंगे तब आपकी आँखों में शायद आंसू आ जाएँ। जी हाँ! दरअसल उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के एक सरकारी स्कूल में … पढ़ना जारी रखें आख़िर क्यों सरकारी स्कूल के इस बच्चे के शर्ट में लटकाया गया ताला?

बिहार में जंगलराज पार्ट 2: स्कूल मास्टर की बारह साल की बेटी ‘नैंसी’ के साथ जो हुआ, रूह काँप उठेगी।

मधुबनी। जिले के लौकही प्रखंड के अंधरामठ थाना क्षेत्र के महादेवमठ गांव निवासी कुमार रवींद्र झा की बारह वर्षीया पुत्री नैन्सी झा का शव शनिवार की रात महादेवमठ गांव स्थित तिलयुगा नदी से बरामद किया गया। शव मिलते ही महादेवमठ गांव के लोग निर्मली-कुनौली पथ को महादेवमठ के पास जाम कर डीएम व एसपी को स्वयं आ वार्ता करने की मांग के साथ हत्यारे की … पढ़ना जारी रखें बिहार में जंगलराज पार्ट 2: स्कूल मास्टर की बारह साल की बेटी ‘नैंसी’ के साथ जो हुआ, रूह काँप उठेगी।

बिहार में जंगल राज: दुल्हन और परिवार की महिलाओं को थाने ले जाकर बेरहमी से पीटा

बिहार राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी ने ‘न्याय के साथ विकास’ की बात कर के जनता का विश्वास तो जरूर जीता; परन्तु शासन में, व्यवहार में या विचार में न न्याय दिखता है और न ही विकास। आखिर क्या हो गया है उस छवि को, जिसके लिए आप जाने जाते थे? आम जनमानस ने सुशासन जैसे न्यायप्रिय शब्द से आपको सम्मानित किया। फिर क्यों…न्याय … पढ़ना जारी रखें बिहार में जंगल राज: दुल्हन और परिवार की महिलाओं को थाने ले जाकर बेरहमी से पीटा

छोटे शहर की लड़की का पीरियड्स

पीरियड्स यानि उजले स्कर्ट में लग जाने वाले खून के धब्बों से होने वाली शर्मिंदगी, चार लड़कियों की उपाय निकालने वाली फुसफुसाहट ,घर के मर्दों से पैड को छुप- छुपाकर रखने से लेके यूज करने की कोशिश, पूजा ना करने से लेके दादी, बुआ,मर्दों को खाना- पानी ना देने की अनुमति वाली अशुद्धता।पीरियड्स यानि छूआआछूत,पूर्वाग्रह, घृणा और फिर कई सारी मिथ्याएं। हमारे लिए पीरियड्स के … पढ़ना जारी रखें छोटे शहर की लड़की का पीरियड्स

Rajasthan

एक गाँव जो 190 साल से है वीरान

नरेंद्र कौशिक बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए जैसलमेर के पश्चिम में 18 किलोमीटर दूर कुलधरा नाम का एक ऐसा गाँव है जहाँ क़रीब दो शताब्दियों से मरघट जैसी शांति है. रात की बात तो दूर दिन में भी कोई अकेला इंसान खंडहर बन चुके घरों में घुसने से डरता है. ऐसी मान्यता है कि पालीवाल ब्राह्मणों ने कुलधरा और जैसलमेर के चारों और 120 किलोमीटर … पढ़ना जारी रखें एक गाँव जो 190 साल से है वीरान