महाकवि नागार्जुन की जयंती पर विशेष

Nagarjun_Poet

नागार्जुन (30जून 1911- 5 नवम्बर 1998) हिन्दी और मैथिली के अप्रतिम लेखक और कवि थे। अनेक भाषाओं के ज्ञाता तथा प्रगतिशील विचारधारा के साहित्यकार नागार्जुन ने हिन्दी के अतिरिक्त मैथिली संस्कृत एवं बाङ्ला में मौलिक रचनाएँ भी कीं तथा संस्कृत, मैथिली एवं बाङ्ला से अनुवाद कार्य भी किया। नागार्जुन का जन्म १९११ ई० की ज्येष्ठ … पढ़ना जारी रखें महाकवि नागार्जुन की जयंती पर विशेष

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अलका सरावगी

alka saraogi

अलका सरावगी (जन्म- 17 नवम्बर,1960, कोलकाता) हिन्दी कथाकार हैं। वे साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी हैं। कोलकाता (भूतपूर्व कलकत्ता) में जन्मी अलका ने हिन्दी साहित्य में एम.ए. और 'रघुवीर सहाय के कृतित्व' विषय पर पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की है। "कलिकथा वाया बाइपास" उनका चर्चित उपन्यास है, जो अनेक भाषाओं में अनुदित हो चुके हैं। अपने प्रथम उपन्यास ‘कलिकथा वाया बायपास’ से … पढ़ना जारी रखें अलका सरावगी

हिंदी साहित्य में महाकवि तुलसीदास का युग – मृत्युंजय दीक्षित

Mahakavi Tulsidas | रामायण

गोस्वामी जी के साहित्य में जीवन की सभी परिस्थितियों का वर्णन है। उन्होंने प्रत्येक काव्य में मानवीय संवेदना की अभिव्यक्ति की है। वे राम के अनन्य भक्त हैं। उन्हें केवल राम पर ही विश्वास है। राम पर पूर्ण विश्वास करते हुए उन्होंने उनके उस मंगलकारी रूप को समाज के सामने प्रस्तुत किया है

मेघदूत – कालिदास (हिंदी रूपांतरण)

Meghdoot by Kalidas in Hindi

कश्चित्‍कान्‍ताविरहगुरुणा स्‍वाधिकारात्‍प्रमत: शापेनास्‍तग्‍ड:मितमहिमा वर्षभोग्‍येण भर्तु:। यक्षश्‍चक्रे जनकतनयास्‍नानपुण्‍योदकेषु स्निग्‍धच्‍छायातरुषु वसतिं रामगिर्याश्रमेषु।|

भूले-बिसरे रचनाकार : अरुणा सीतेश

bhule bisre rachnakaar Hindi

Aruna Sitesh | Literature in India डॉ॰ अरुणा सीतेश (३१ अक्टूबर१९४५-१९ नवंबर२००७) हिंदी की प्रसिद्ध कथाकार थीं। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से १९६५ में अंग्रेज़ीसाहित्य में एम. ए. किया और स्वर्ण पदक भी प्राप्त किया। १९७० में उन्होंने यहीं से डी. फ़िल की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध इंद्रप्रस्थ कॉलेज में प्राध्यापिका के पद से उन्होंने अपने कार्य-जीवन का प्रारंभ किया। बाद … पढ़ना जारी रखें भूले-बिसरे रचनाकार : अरुणा सीतेश

मौत से ठन गई – अटल बिहारी वाजपेयी

maut se than gayi poem by atal bihari vajpayee

ठन गई! मौत से ठन गई! जूझने का मेरा इरादा न था, मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था, रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई, यों लगा ज़िन्दगी से बड़ी हो गई। मौत की उमर क्या है? दो पल भी नहीं, ज़िन्दगी सिलसिला, आज कल की नहीं। मैं जी भर जिया, मैं मन से … पढ़ना जारी रखें मौत से ठन गई – अटल बिहारी वाजपेयी

कुटज – आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी

कहते हैं, पर्वत शोभा-निकेतन होते हैं। फिर हिमालय का तो कहना ही क्‍या। पूर्व और अपार समुद्र - महोदधि और रत्‍नाकर - दोनों को दोनों भुजाओं से थाहता हुआ हिमालय 'पृथ्‍वी का मानदंड' कहा जाय तो गलत क्‍यों है? कालिदास ने ऐसा ही कहा था। इसी के पाद-देश में यह जो श्रृंखला दूर तक लोटी … पढ़ना जारी रखें कुटज – आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी