जब हमीरपुर के डीएम ने दी थी मुंशी प्रेमचंद को धमकी

हिंदी साहित्य में प्रेमचंद का कद काफी ऊंचा है और उनका लेखन कार्य एक ऐसी विरासत है, जिसके बिना हिंदी के विकास को अधूरा ही माना जाएगा। मुंशी प्रेमचंद एक संवेदनशील लेखक, सचेत नागरिक, कुशल वक्ता और बहुत ही सुलझे हुए संपादक थे। प्रेमचंद ने हिंदी कहानी और उपन्यास की एक ऐसी परंपरा का विकास किया, जिसने एक पूरी सदी के साहित्य का मार्गदर्शन किया। उनकी लेखनी इतनी समृद्ध थी … पढ़ना जारी रखें जब हमीरपुर के डीएम ने दी थी मुंशी प्रेमचंद को धमकी

प्रेमचंद के जन्मदिवस पर विशेष

दुनिया के महानतम कथाकारों में शुमार मुंशी प्रेमचंद ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा गोरखपुर की जिस रावत पाठशाला से पाई थी वहां उनका नामोनिशां तक नहीं है। यही नहीं पाठशाला के आधे से ज्यादा हिस्से की दीवारें दरककर आज जीर्णशीर्ण अवस्था में पड़ी हैं। गोरखपुर नगर निगम ने पिछले साल कुछ काम जरूर कराया लेकिन पाठशाला से उसके अति विशिष्ट छात्र प्रेमचंद के रिश्ते को धरोहर … पढ़ना जारी रखें प्रेमचंद के जन्मदिवस पर विशेष

Kedarnath Singh

केदारनाथ सिंह के जन्मदिवस पर विशेष प्रस्तुति

केदारनाथ सिंह (७ जुलाई १९३४ – १९ मार्च २०१८), हिन्दी के सुप्रसिद्ध कवि व साहित्यकार थे। वे अज्ञेय द्वारा सम्पादित तीसरा सप्तक के कवि रहे। भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा उन्हें वर्ष २०१३ का ४९वां ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया था। वे यह पुरस्कार पाने वाले हिन्दी के १०वें लेखक थे। केदारनाथ सिंह का जन्म ७ जुलाई १९३४ ई॰ को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के चकिया … पढ़ना जारी रखें केदारनाथ सिंह के जन्मदिवस पर विशेष प्रस्तुति

Nagarjun_Poet

महाकवि नागार्जुन की जयंती पर विशेष

नागार्जुन (30जून 1911- 5 नवम्बर 1998) हिन्दी और मैथिली के अप्रतिम लेखक और कवि थे। अनेक भाषाओं के ज्ञाता तथा प्रगतिशील विचारधारा के साहित्यकार नागार्जुन ने हिन्दी के अतिरिक्त मैथिली संस्कृत एवं बाङ्ला में मौलिक रचनाएँ भी कीं तथा संस्कृत, मैथिली एवं बाङ्ला से अनुवाद कार्य भी किया। नागार्जुन का जन्म १९११ ई० की ज्येष्ठ पूर्णिमा को वर्तमान मधुबनी जिले के सतलखा में हुआ था। … पढ़ना जारी रखें महाकवि नागार्जुन की जयंती पर विशेष

नामवर सिंह

कितना जानते हैं आप हिंदी के युग स्तम्भ नामवर सिंह को?

हिंदी के प्रख्यात आलोचक, लेखक और विद्वान डॉ नामवर सिंह के बारे में जितना भी कहा जाए कम है. वह हिंदी आलोचना के शलाका पुरुष थे. साल 2017 में जब साहित्य अकादमी ने अपनी सर्वाधिक प्रतिष्ठित महत्तर सदस्यता यानी फैलोशिप प्रदान की थी, तो उनकी तारीफ में ढेरों बातें कही गई थीं. अकादमी के तत्कालीन अध्यक्ष विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने कहा था, ‘नामवर सिंह की … पढ़ना जारी रखें कितना जानते हैं आप हिंदी के युग स्तम्भ नामवर सिंह को?

Amritlal-Nagar-Literature-in-India

जीवनी : अमृतलाल नागर

अमृतलाल नागर (17 अगस्त, 1916 – 23 फरवरी, 1990) हिन्दी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार थे। आपको भारत सरकार द्वारा १९८१ में साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। जीवनी अमृत लाल नागर का जन्म 17 अगस्त 1916 ई0 को आगरा (उत्तर प्रदेश) में एक गुजराती ब्राह्मण परिवार में हुआ। आपके पिता का नाम राजाराम नागर था। आपके पितामह पं. शिवराम नागर 1895 से लखनऊ आकर बस गए थे। आपकी पढ़ाई हाईस्कूल तक ही हुई। फिर … पढ़ना जारी रखें जीवनी : अमृतलाल नागर

मशहूर कवि एवं गीतकार शैलेंद्र पर विशेष

सरल और सहज शब्दों से जादूगरी करने वाले शैलेंद्र का जन्म 30 अगस्त, 1923 को रावलपिंडी में हुआ था. मूल रूप से उनका परिवार बिहार के भोजपुर का था. लेकिन फ़ौजी पिता की तैनाती रावलपिंडी में हुई तो घर बार छूट गया. रिटायरमेंट के बाद शैलेंद्र के पिता अपने एक दोस्त के कहने पर मथुरा में बस गए.   लोकप्रिय गीत आवारा हूँ (श्री ४२०) … पढ़ना जारी रखें मशहूर कवि एवं गीतकार शैलेंद्र पर विशेष

प्रसिद्ध गीतकार कवि प्रदीप पर विशेष

ऐ मेरे वतन के लोगों जरा आँख में भर लो पानी जो शहीद हुए हैं उनकी जरा याद करो कुरबानी   मौत के साए में हर घर है, कब क्या होगा किसे खबर है बंद है खिड़की, बंद है द्वारे, बैठे हैं सब डर के मारे ~ चुपके चुपके रोनेवाले रखना छुपा के दिल के छाले रे ये पत्थर का देश है पगले यहां कोई … पढ़ना जारी रखें प्रसिद्ध गीतकार कवि प्रदीप पर विशेष

हिन्दी और मैथिली के प्रसिद्ध कवि एवं कहानीकार राजकमल चौधरी के जन्मदिवस पर विशेष

अँधेरे में, (गर्म दूध पीती हुई) बिल्ली का चेहरा नहीं देख पाता हूँ, सिर्फ आँखें। हर रात इसी वक्त बिजली कट जाती है।   “… चाय तैयार है, आओ पिएँ…”     एक प्रश्न हजार उत्तर— “मैंने सूरज से पूछा—धरती कब आग का गोला बन जाएगी ? मुझसे सूरज ने पूछा—तुम बरफ-घर में सोये कब तक ?”   ~ राजकमल चौधरी अगर आप भी लिखते … पढ़ना जारी रखें हिन्दी और मैथिली के प्रसिद्ध कवि एवं कहानीकार राजकमल चौधरी के जन्मदिवस पर विशेष

मैथिलीशरण गुप्त की पुण्यतिथि पर विशेष

“चारुचंद्र की चंचल किरणें खेल रहीं हैं जल थल में स्वच्छ चाँदनी बिछी हुई है अवनि और अम्बरतल में” देखो कृषक शोषित, सुखाकर हल तथापि चला रहे किस लोभ से इस आँच में, वे निज शरीर जला रहे यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो समझो जिसमें यह व्यर्थ न हो कुछ तो उपयुक्त करो तन को नर हो, न निराश करो मन को ~ मैथिलीशरण … पढ़ना जारी रखें मैथिलीशरण गुप्त की पुण्यतिथि पर विशेष

सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन “अज्ञेय”

सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन “अज्ञेय” (7 मार्च, 1911- 4 अप्रैल, 1987) को प्रतिभासम्पन्न कवि, शैलीकार, कथा-साहित्य को एक महत्त्वपूर्ण मोड़ देने वाले कथाकार, ललित-निबन्धकार, सम्पादक और सफल अध्यापक के रूप में जाना जाता है।[1] इनका जन्म 7 मार्च 1911 को उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के कुशीनगर नामक ऐतिहासिक स्थान में हुआ। बचपन लखनऊ, कश्मीर, बिहार और मद्रास में बीता। बी.एस.सी. करके अंग्रेजी में एम.ए. करते समय क्रांतिकारी आन्दोलन से जुड़कर बम बनाते हुए पकडे गये और वहाँ से फरार भी हो गए। सन्1930 ई. के … पढ़ना जारी रखें सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन “अज्ञेय”

Atal Bihari Vajpayee speaking in front of Huge mass about Nehru

जिन नेहरु को आज भाजपाई गरिया रहें है, उनकी मौत पर अटल जी की आखें हुई थी नम

महोदय, एक सपना था जो अधूरा रह गया, एक गीत था जो गूँगा हो गया, एक लौ थी जो अनन्त में विलीन हो गई। सपना था एक ऐसे संसार का जो भय और भूख से रहित होगा, गीत था एक ऐसे महाकाव्य का जिसमें गीता की गूँज और गुलाब की गंध थी। लौ थी एक ऐसे दीपक की जो रात भर जलता रहा, हर अँधेरे … पढ़ना जारी रखें जिन नेहरु को आज भाजपाई गरिया रहें है, उनकी मौत पर अटल जी की आखें हुई थी नम

अवॉर्ड आप रखिए, मैं अपनी इज़्ज़त रखता हूं

उस्ताद इशरत खां ने पद्मश्री अवार्ड को ठुकराते हुए भारत सरकार को जो पत्र लिखा है, वह एक बड़े कलाकार की पीड़ा का दस्तावेज़ बन गया है। वेदना, व्यंग्य और कलाकार के आत्मस्वाभिमान में डूबा यह पत्र पढ़ने लायक ही नहीं, संजो कर रखने लायक है। भाषा और शैली ऐसी जैसे सआदत हसन मंटो ने ख़ुद, इमरत खां के लिए, जन्नत या दोज़ख जहां भी … पढ़ना जारी रखें अवॉर्ड आप रखिए, मैं अपनी इज़्ज़त रखता हूं

Munshi Premchand

मुंशी प्रेमचंद | Munshi Premchand

जन्म प्रेमचन्द का जन्म ३१ जुलाई सन् १८८० को बनारस शहर से चार मील दूर लमही गाँव में हुआ था। आपके पिता का नाम अजायब राय था। वह डाकखाने में मामूली नौकर के तौर पर काम करते थे। जीवन धनपतराय की उम्र जब केवल आठ साल की थी तो माता के स्वर्गवास हो जाने के बाद से अपने जीवन के अन्त तक लगातार विषम परिस्थितियों … पढ़ना जारी रखें मुंशी प्रेमचंद | Munshi Premchand

नरेश मेहता | Naresh Mehta

नरेश मेहता

ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित हिन्दी के यशस्वी कवि श्री नरेश मेहता उन शीर्षस्थ लेखकों में हैं जो भारतीयता की अपनी गहरी दृष्टि के लिए जाने जाते हैं। नरेश मेहता ने आधुनिक कविता को नयी व्यंजना के साथ नया आयाम दिया। रागात्मकता, संवेदना और उदात्तता उनकी सर्जना के मूल तत्त्व है, जो उन्हें प्रकृति और समूची सृष्टि के प्रति पर्युत्सुक बनाते हैं। आर्ष परम्परा और साहित्य को श्रीनरेश मेहता के काव्य में नयी दृष्टि मिली। साथ ही, प्रचलित साहित्यिक रुझानों से एक तरह की दूरी ने उनकी काव्य-शैली और संरचना को विशिष्टता दी। पढ़ना जारी रखें नरेश मेहता

देवकीनन्दन खत्री | Devki Nandan Khatri

देवकीनन्दन खत्री | Devki Nandan Khatri

बाबू देवकीनन्दन खत्री (29 जून 1861 – 1 अगस्त 1913) हिंदी के प्रथम तिलिस्मी लेखक थे। उन्होने चंद्रकांता, चंद्रकांता संतति, काजर की कोठरी, नरेंद्र-मोहिनी,कुसुम कुमारी, वीरेंद्र वीर, गुप्त गोंडा, कटोरा भर, भूतनाथ जैसी रचनाएं की। ‘भूतनाथ’ को उनके पुत्र दुर्गा प्रसाद खत्री ने पूरा किया। हिंदी भाषा के प्रचार प्रसार में उनकेउपन्यास चंद्रकांता का बहुत बड़ा योगदान रहा है। इस उपन्यास ने सबका मन मोह लिया। इस किताब का रसास्वादन के लिए कई गैर-हिंदीभाषियों ने हिंदी सीखी। बाबू देवकीनंदन खत्री ने ‘तिलिस्म’, ‘ऐय्यार’ और ‘ऐय्यारी’ जैसे शब्दों को हिंदीभाषियों के बीच लोकप्रिय बनाया। जितने हिन्दी पाठक उन्होंने (बाबू देवकीनन्दन खत्री ने) उत्पन्न किये उतने किसी और ग्रंथकार ने नहीं। पढ़ना जारी रखें देवकीनन्दन खत्री | Devki Nandan Khatri

यशपाल | Yashpal

यशपाल | Yashpal

आधुनिक हिन्दी साहित्य के कथाकारों में यशपाल का नाम प्रमुख है । ये एक साथ क्रांतिकारी और साहित्यकार, दोनों रूपों में जाने जाते है। इनका जन्म ३ दिसम्बर ,१९०३ को पंजाब के फिरोजपुर छावनी में हुआ था। इनकी माता का नाम प्रेमा देवी और पिता का नाम लाला हीरालाल था। बचपन में इनकी शिक्षा गुरुकुल कांगडी में हुई। सातवी कक्षा में अत्यधिक बीमार पड़ जाने के कारण ,इनकी माँ इन्हे लेकर लाहौर चली आई। पढ़ना जारी रखें यशपाल | Yashpal

भीष्म साहनी | Bhisham Sahni

भीष्म साहनी | Bhisham Sahni

प्रगतिवादी आन्दोलन 1930 के बाद उभर रहे यथार्थवादी परिणामों व परिस्थितियों को विकसित करने वाला आन्दोलन था। इस आन्दोलन ने सामाजिकता से परिपुष्ट यथार्थवादी कथा साहित्य की नींव रखी। प्रगतिवादी साहित्य को प्रारम्भिक दौर में रचना की दृष्टि से नेतृत्व व निर्देशन प्रेमचन्द, पंत, निराला और उग्र से मिला परन्तु उपन्यास के माध्यम से मार्क्सवादी विचारों को जनता तक पहुँचाने का प्रथम प्रयास राहुल सांकृत्यायन ने ‘भागो नही दुनिया को बदलो’ के माध्यम से किया।
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