Mahakavi Tulsidas | रामायण

हिंदी साहित्य में महाकवि तुलसीदास का युग – मृत्युंजय दीक्षित

गोस्वामी जी के साहित्य में जीवन की सभी परिस्थितियों का वर्णन है। उन्होंने प्रत्येक काव्य में मानवीय संवेदना की अभिव्यक्ति की है। वे राम के अनन्य भक्त हैं। उन्हें केवल राम पर ही विश्वास है। राम पर पूर्ण विश्वास करते हुए उन्होंने उनके उस मंगलकारी रूप को समाज के सामने प्रस्तुत किया है पढ़ना जारी रखें हिंदी साहित्य में महाकवि तुलसीदास का युग – मृत्युंजय दीक्षित

वायुसैनिक अभिनन्दन

लहूलुहान विंग कमांडर अभिनंदन की दिलेरी

विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान को अपनी हिरासत में लेने के बाद पाकिस्तान ने बुधवार को पहले दो वीडियो जारी की थी। पहले वीडियो में भारतीय वायुसेना की वर्दी पहने शख्स को स्थानीय लोगों की तरफ से पीटा जा रहा था। इस भीड़ से छुड़ाकर पाक सेना के जवानों ने उसे अपनी हिरासत में ले लिया। पढ़ना जारी रखें लहूलुहान विंग कमांडर अभिनंदन की दिलेरी

Meghdoot by Kalidas in Hindi

मेघदूत – कालिदास (हिंदी रूपांतरण)

कश्चित्‍कान्‍ताविरहगुरुणा स्‍वाधिकारात्‍प्रमत:
शापेनास्‍तग्‍ड:मितमहिमा वर्षभोग्‍येण भर्तु:।
यक्षश्‍चक्रे जनकतनयास्‍नानपुण्‍योदकेषु
स्निग्‍धच्‍छायातरुषु वसतिं रामगिर्याश्रमेषु।| पढ़ना जारी रखें मेघदूत – कालिदास (हिंदी रूपांतरण)

Vikramovarshiyam_kalidas| Apsara| Urvashi

कालिदास के संस्कृत नाटक विक्रमोर्वशीयम् का हिन्दी कथा रूपांतर।

एक बार देवलोक की परम सुंदरी अप्सरा उर्वशी अपनी सखियों के साथ कुबेर के भवन से लौट रही थी। मार्ग में केशी दैत्य ने उन्हें देख लिया और तब उसे उसकी सखी चित्रलेखा सहित वह बीच रास्ते से ही पकड़ कर ले गया। पढ़ना जारी रखें कालिदास के संस्कृत नाटक विक्रमोर्वशीयम् का हिन्दी कथा रूपांतर।

Saina Nehwal vs Carolina Marin Final, Indonesia Masters 2018 Live

इंडोनेशिया मास्टर्स: साइना नेहवाल बनीं चैंपियन

वर्ल्ड नंबर-9 भारतीय महिला बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल ने रविवार को यहां इंडोनेशिया मास्टर्स का खिताब अपने नाम किया। पिछले दो वर्षों में साइना का यह पहला बीडब्ल्यूएफ खिताब है। साइना ने इससे पहले 2016 में बीडब्ल्यूएफ सुपर सीरीज ऑस्ट्रेलियन ओपन खिताब जीता था।  मुकाबले में साइना की प्रतिद्वंद्वी स्पेन की कैरोलिना मारिन चोट के कारण रिटायर्ड हर्ट हो गई और भारतीय खिलाड़ी को विजेता घोषित किया गया। मैच केवल सात … पढ़ना जारी रखें इंडोनेशिया मास्टर्स: साइना नेहवाल बनीं चैंपियन

कश्मीरी पंडित नरसंहार

जब कश्मीरियों को कहा गया कि इस्लामिक ड्रेस कोड अपनाएं।

घाटी में कश्मीरी पंडितों के बुरे दिनों की शुरुआत 14 सितंबर 1989 से हुई। भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य और वकील कश्मीरी पंडित, तिलक लाल तप्लू की जेकेएलएफ ने हत्या कर दी। पढ़ना जारी रखें जब कश्मीरियों को कहा गया कि इस्लामिक ड्रेस कोड अपनाएं।

kashmiri pandit | कश्मीरी पंडित

कौन है कश्मीरी पंडित?

4 जनवरी 1990 को कश्मीर के प्रत्येक हिंदू घर पर एक नोट चिपकाया गया, जिस पर लिखा था- कश्मीर छोड़ के नहीं गए तो मारे जाओगे। पढ़ना जारी रखें कौन है कश्मीरी पंडित?

bhule bisre rachnakaar Hindi

भूले-बिसरे रचनाकार : अरुणा सीतेश

डॉ॰ अरुणा सीतेश (३१ अक्टूबर१९४५-१९ नवंबर२००७) हिंदी की प्रसिद्ध कथाकार थीं। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से १९६५ में अंग्रेज़ीसाहित्य में एम. ए. किया और स्वर्ण पदक भी प्राप्त किया। १९७० में उन्होंने यहीं से डी. फ़िल की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध इंद्रप्रस्थ कॉलेज में प्राध्यापिका के पद से उन्होंने अपने कार्य-जीवन का प्रारंभ किया। बाद में वे क्रमशः रीडर तथा प्रधानाचार्या के पद पर आसीन हुईं। अंग्रेज़ी की प्राध्यापिका और प्रख्यात … पढ़ना जारी रखें भूले-बिसरे रचनाकार : अरुणा सीतेश

दूल्हे का सेहरा – लच्छू महाराज एवं बिरजू महाराज

देखिये बिरजू महाराज और लच्छू महाराज से गुफ़्तगू|  पढ़ना जारी रखें दूल्हे का सेहरा – लच्छू महाराज एवं बिरजू महाराज

आर्ट का पुल – फ़हीम आज़मी

पहले तो सारा इलाका एक ही था और उसका नाम भी एक ही था। इलाका बहुत उपजाऊ था। बहुत से बाग, खेत, जंगली पौधे, फूल और झाडियाँ सारे क्षेत्र में फैली हुयीं थीं। इसइलाके के वासियों को अपने जीवन की आवश्यकताएँ जुटाने के लिये किसी और इलाके पर आश्रित नहीं होना पडता था।खेतों से अनाज, पेसों से मकान बनाने और जलाने केलिये लकडियाँ, भट्टों से … पढ़ना जारी रखें आर्ट का पुल – फ़हीम आज़मी

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आत्मा शब्द मुक्तबोध की कविता का बीज

गजानन माधव मुक्तिबोध का 1964 में निधन हुआ और उसी वर्ष उनका पहला कविता संग्रह ‘चाँद का मुँह टेढ़ा है’ प्रकाशित हुआ जिसे वो अपनी आँखों देख नहीं पाए.   इन पचास वर्षों में हिन्दी कविता पर जिस एक महत्तर कवि का सर्वाधिक सृजनात्मक प्रभाव महसूस किया गया है, जो आगे की कवि पीढ़ी की धमनियों में बहता है वह निस्संदेह मुक्तिबोध हैं.   आधुनिक … पढ़ना जारी रखें आत्मा शब्द मुक्तबोध की कविता का बीज

maut se than gayi poem by atal bihari vajpayee

मौत से ठन गई – अटल बिहारी वाजपेयी

ठन गई! मौत से ठन गई! जूझने का मेरा इरादा न था, मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था, रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई, यों लगा ज़िन्दगी से बड़ी हो गई। मौत की उमर क्या है? दो पल भी नहीं, ज़िन्दगी सिलसिला, आज कल की नहीं। मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूँ, लौटकर आऊँगा, कूच से क्यों डरूँ? तू दबे पाँव, … पढ़ना जारी रखें मौत से ठन गई – अटल बिहारी वाजपेयी

karwa chauth kaise karen_literature in india

करवाचौथ विशेष : शिकायत चाँद से

कहाँ गया है चाँद हमारा आज प्रिये की पूजा है । कब तक ऐसे छुपा रहेगा बिना तेरे न दूजा है । भूख प्यास से व्याकुल है वो कुछ तो उसका ख्याल करो । जल्दी से आ जाओ प्यारे उसको न बेहाल करो । मांग भरे वो कब से बैठी बस तेरा इंतजार करे । क्यों इतना तरसाता इनको तुझको इतना प्यार करे । थाल … पढ़ना जारी रखें करवाचौथ विशेष : शिकायत चाँद से

कुटज – आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी

कहते हैं, पर्वत शोभा-निकेतन होते हैं। फिर हिमालय का तो कहना ही क्‍या। पूर्व और अपार समुद्र – महोदधि और रत्‍नाकर – दोनों को दोनों भुजाओं से थाहता हुआ हिमालय ‘पृथ्‍वी का मानदंड’ कहा जाय तो गलत क्‍यों है? कालिदास ने ऐसा ही कहा था। इसी के पाद-देश में यह जो श्रृंखला दूर तक लोटी हुई है, लोग इसे ‘शिवालिक’ श्रृंखला कहते हैं। ‘शिवालिक’ का … पढ़ना जारी रखें कुटज – आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी

Andhkaar se joojhna hai_hajari prasad dwivedi_literature in india

अंधकार से जूझना है – आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी

दीवाली याद दिला जाती है उस ज्ञानलोक के अभिनव अंकुर की, जिसने मनुष्‍य की कातर प्रार्थना को दृढ़ संकल्‍प का रूप दिया था – अंधकार से जूझना है, विघ्न-बाधाओं की उपेक्षा करके, संकटों का सामना करके। पढ़ना जारी रखें अंधकार से जूझना है – आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी

Hindi Sahitya ka aadhunik kaal - Literature in India

हिंदी साहित्य का आधुनिक काल

हिंदी साहित्य का आधुनिक काल तत्कालीन राजनैतिक गतिविधियों से प्रभावित हुआ। इसको हिंदी साहित्य का सर्वश्रेष्ठ युग माना जा सकता है, जिसमें पद्य के साथ-साथ गद्य, समालोचना, कहानी, नाटक व पत्रकारिता का भी विकास हुआ।   सं 1800 वि. के उपरांत भारत में अनेक यूरोपीय जातियां व्यापार के लिए आईं। उनके संपर्क से यहां पाश्चात्य सभ्यता का प्रभाव पड़ना प्रारंभ हुआ। विदेशियों ने यहां के देशी … पढ़ना जारी रखें हिंदी साहित्य का आधुनिक काल

Khilaune wala_Subhadra Kumari Chauhan_Literature in India

खिलौनेवाला – सुभद्रा कुमारी चौहान

वह देखो माँ आज खिलौनेवाला फिर से आया है। कई तरह के सुंदर-सुंदर नए खिलौने लाया है। हरा-हरा तोता पिंजड़े में गेंद एक पैसे वाली छोटी सी मोटर गाड़ी है सर-सर-सर चलने वाली। सीटी भी है कई तरह की कई तरह के सुंदर खेल चाभी भर देने से भक-भक करती चलने वाली रेल। गुड़िया भी है बहुत भली-सी पहने कानों में बाली छोटा-सा \\\’टी सेट\\\’ … पढ़ना जारी रखें खिलौनेवाला – सुभद्रा कुमारी चौहान

भारतीय साहित्य की मूलभूत एकता और उसके आधार-तत्व

भारत की प्रत्येक भाषा के साहित्य का अपना स्वतंत्र और प्रखर वैशिष्ट्य है जो अपने प्रदेश के व्यक्तित्व से मुद्रांकित है। पंजाबी और सिंधी, इधर हिन्दी और उर्दू की प्रदेश-सीमाएँ कितनी मिली हुई हैं ! किंतु उनके अपने-अपने साहित्य का वैशिष्ट्य कितना प्रखर है ! इसी प्रकार गुजराती और मराठी का जन-जीवन परस्पर ओतप्रोत है, किंतु क्या उनके बीच में किसी प्रकार की भ्रांति संभव … पढ़ना जारी रखें भारतीय साहित्य की मूलभूत एकता और उसके आधार-तत्व

शब्दशक्ति के प्रकार

हिन्दी व्याकरण में शब्दशक्ति तीन प्रकार की होती है: अभिधा वे वाक्य जिनका साधारण शाब्दिक अर्थ और भावार्थ समान हो तो उसे अभिधा शब्द शक्ति कहते हैं। इसमें सभी पाठकों अथवा वाचकों अथवा श्रोताओं के लिए वाक्य अथवा वाक्यांश का अर्थ समान होता है। इसमें उत्पन्न भाव को वाच्यार्थ कहा जाता है। उदाहरण हिन्दी एक भाषा है। : पाइलेट बाजार जाता है वाक्य का अर्थ … पढ़ना जारी रखें शब्दशक्ति के प्रकार

Hindi dialects - literature in india dot com

हिंदी की विभिन्न बोलियाँ और उनका साहित्य

हिन्दी की अनेक बोलियाँ (उपभाषाएँ) हैं, जिनमें अवधी, ब्रजभाषा, कन्नौजी, बुंदेली, बघेली, भोजपुरी, हरयाणवी, राजस्थानी, छत्तीसगढ़ी, मालवी, झारखंडी, कुमाउँनी, मगही आदि प्रमुख हैं। इनमें से कुछ में अत्यंत उच्च श्रेणी के साहित्य की रचना हुई है। ऐसी बोलियों में ब्रजभाषा और अवधी प्रमुख हैं। यह बोलियाँ हिन्दी की विविधता हैं और उसकी शक्ति भी। वे हिन्दी की जड़ों को गहरा बनाती हैं। हिन्दी की बोलियाँ और उन बोलियों की उपबोलियाँ हैं जो न केवल अपने में एक बड़ी परंपरा, इतिहास, सभ्यता को समेटे हुए हैं वरन स्वतंत्रता संग्राम, जनसंघर्ष, वर्तमान के बाजारवाद … पढ़ना जारी रखें हिंदी की विभिन्न बोलियाँ और उनका साहित्य