अपनी उत्कृष्ट रचना ; एक छायाचित्र एवं संक्षिप्त विवरण के साथ हमें निम्लिखित पते पर भेजें – 

editor_team@literatureinindia.com

सुझाव हेतु:

adteam@literatureinindia.com

महत्वपूर्ण सूचना: २०० से अधिक रचनाएँ प्रकाशनार्थ पंक्तिबद्ध होने के कारण दिसंबर माह तक कोई भी नई रचना प्रकाशनार्थ स्वीकार नहीं की जा सकेगी| आपको हुई असुविधा हेतु खेद है|

नोट:

  • रचना प्रकाशनार्थ प्राप्त होने के उपरांत प्रकाशन हेतु विचाराधीन रहेगी| प्रकाशन हेतु सहमति के पश्चात रचना को literatureinindia.com पर प्रकाशित किया जायेगा|
  • प्राप्त रचनाओं की संख्या अधिक होने के कारण इस पूरी प्रक्रिया में 15-20 दिन का समय अपेक्षित है|

111 thoughts on “रचनाएँ भेजे

    1. आपकी रचना प्रकाशनार्थ प्राप्त हुई है। जल्द ही आपको प्रकाशन संबंधी सूचना सामाजिक तंत्र पर दी जायेगी।
      सादर!

      पसंद करें

  1. महोदय ! हमने कल ही आपको अपनी ३ रचनाएँ प्रकाशन हेतु भेजी हैं, २ ग़ज़लें ,१ कविता . आप इनको कब और कहाँ प्रकाशित करेंगे ? कृपया बताने का कष्ट करें. और एक तस्वीर भी इ-मेल द्वारा कल ही भेजी है. आशा है आपको मिल गयी होगी.
    धन्यवाद !

    पसंद करें

  2. महोदय ! प्रणाम ! आप मेरी रचनाएँ कब प्रकाशित करोगे ,और कहाँ प्रकाशित करोगे ? क्या मुझे इसकी पूर्व-सूचना मिलेगी?

    पसंद करें

  3. आदरणीय महोदय ,आपका बहुत-बहुत धन्यवाद ,जो आपने मेरी ग़ज़ल को अपनी इ- पत्रिका में प्रकाशित कर मुझे उत्साहित किया . मगर मेरी बाकी २ रचनाएँ कहाँ है ? मैने आपको ३ रचनाएँ भेजी थी. . बस यही जानना चाहती हूँ.

    Liked by 1 व्यक्ति

  4. मै शिवम गौतम पिता का नाम -राम केवल
    माता का नाम-साबित्री देवी पता-कालिकापुर पोस्ट-हमजापुर पठान तसील- कादीपुर जिला-सुल्तानपुर
    मै कविता प्रकाशित हेतु भेजा था वह कब प्रकाशित होगी कृपया सुचिता करे
    कृयया कर के मेरे ईमेल पते पर भेजे
    अगर मेरी वाणी आप तक पहुची है
    तो थोडा कष्ट करे||

    ( प्रणाम )

    पसंद करें

    1. प्रिय शिवम,

      नमस्कार!

      आपको यह सूचित करना है कि प्रकाशन मंडल ने आपकी रचनाओं को प्रकाशन हेतु सहमति प्रदान नहीं की है, इस हेतु हमें खेद है|

      आप रचनाकारों को पढ़ें और बेहतर रचना हेतु प्रयास करे, आप हमें अपनी उत्तम रचना के साथ फिर मिले, हम यही आशा करते है|

      हम उम्मीद करते है कि आप निराश नहीं होंगे बल्कि और बेहतर रचने हेतु प्रयासरत रहेंगे|

      शुभकामनाओं सहित,

      पसंद करें

  5. पिंगबैक: Share – maithilview
  6. महोदय ,
    मैंने अज्ञातवश एक साथ 8 कविताये भेज दी है।
    मुझे बाद में पता चला कि 1 माह में 3 कविता से ज्यादा नही भेजना होता है।
    कृपया करके आप मेरा पथ प्रदर्शित करें।

    पसंद करें

    1. एक बार, ईमेल के विषय में अपना पूरा नाम लिखे| ताकि आप द्वारा भेजी गयी रचनाओं हेतु भविष्य में आपसे छायाचित्र हेतु अनुरोध करने की आवश्यकता न हो|

      सादर!

      पसंद करें

  7. महोदय ,
    मैंने अपनी कविता literaturepoint@gmail.com पर दी थी।
    आज मुझे रिप्लाई मिला है कि
    हम आपकी किसी भी कविता का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।
    उपयोग नहीं कर पा रहे हैं का क्या मतलब है सर, मेरी कविता आप को पसंद नही आई।

    Liked by 1 व्यक्ति

  8. महोदय, मैने आपको तीन मौलिक रचनाएं भेजी हैं।तथा वो रचनाए आपको पसंद आयी या नही। कृपया आप टिप्पणी जरूर करे।

    पसंद करें

  9. महोदय, रचनाएं प्रेषित की गई हैं ,कृपया बताने का कष्ट करें की उन रचनाओं का लिट्ट्रेचर इन इंडिया में क्या भविष्य है।सधन्यवाद ।

    Liked by 1 व्यक्ति

  10. महोदय जी एक रचना अभी फाम॔ भर कर भेजी ।अतः रचना प्रप्ती व उसके संबंध में जानकारी देने का कष्ट करे ।रचना मौलिक तैयार की गई है ।सधन्यवाद ।

    Liked by 1 व्यक्ति

    1. प्रिय आबिद जी! प्रत्येक रचना का प्रकाशनाधिकार प्रकाशन मंडल के पास सुरक्षित है। रचना प्राप्ति के बाद विचार-विमर्श के उपरांत प्रकाशन सम्बंधी निर्णय लिया जाता है। प्रत्येक रचना प्रकाशित हो, यह ज़रूरी नहीं है…न ही न्यायसंगत है। हम प्रकाशित न होने पर एक स्मारक रचनाकार को ईमेल के माध्यम से भेजते है।

      रचना प्रकाशित होने पर स्वयं जालपत्रिका एवं फ़ेसबुक/ट्विटर के माध्यम से सूचना प्राप्त की जा सकती है।

      facebook.com/literatureinindia
      twitter.com/LiteratureIN

      सादर!

      पसंद करें

    1. दिनेश जी!

      लिटरेचर इन इंडिया में सम्पर्क हेतु आभार!

      फ़िलहाल हम वेब पर प्रकाशन करते है, अतः अभी आय वितरण सम्बंधी कोई योजना प्रगतिशील नहीं हैं।

      भविष्य में अगर इस तरह की कोई योजना हमारी टीम द्वारा स्वीकृत की जाएगी तो हम आपको विभिन्न सामाजिक माध्यमों एवं व्यक्तिगत रूप से अवश्य अवगत कराएँगे।

      सादर!

      पसंद करें

  11. मेरी रचना के प्रकाशन होने से सम्बंधित मेल प्राप्त हुआ।
    धन्यवाद !
    क्या मुझे यह जानकारी मिलेगी कि मेरी रचना कहाँ प्रकाशित हुई है।

    पसंद करें

      1. बारिश
        इन बरसती बूँदों को,
        तुम बारिश कहते हो..
        मेरे शब्दकोश में इसे
        ‘प्रेम’ कहते हैं…

        जब ये बरसता है
        मैं अपने आंगन में जाकर
        तुम्हारे प्रेम में बस
        भीगती ही जाती हूँ……

        पैरों में ना जानें कहाँ से
        नूपुर की झंकार,
        हांथों में,तुम्हारे प्रेम में रंगी,
        लाल-हरी चूड़ियाँ
        एक शोर उठा लेती हैं…

        तुम्हारे प्रेम की बूँदें,
        सब तुम्हारी अठखेलियाँ सीख
        मेरे बंधे बालों को खोलकर
        शरारतें कर जातीं हैं….

        मैं भी सब भूलकर
        तुम्हारे प्रेम में झूम उठती हूँ
        नाच उठती हूँ…
        यही तो तुम चाहते हो ना,
        मैं बस तुम्हारे प्रेम में नाच उठूँ..

        तुम मुस्कुरा जाते हो मुझमें
        और बरसाने लगते हो,
        प्रेम के बेले,गुलाब, चमेली..
        फिर दोनों ही मोर-मोरनी जैसे,
        इस बारिश में,
        प्रेम की बारिश में,
        आनन्दित हो नाचते जाते हैं..
        भीगते जाते हैं……

        @p.m.@✍

        पसंद करें

      2. *बचपन की बातें*

        वो स्कूल की देर,
        पर माँ से खुद नहाने की जिद
        फिर शुरू
        साबुन के फेने का खेल,,
        वो संभाल संभाल के फूँकना
        फेनों के गुब्बारे…..
        कि जब तक एक बड़ा फूँक ना लूँ….
        फिर पड़ता था पीठ पर थपाक से एक,
        माँ की चार उंगलियों की थाप
        और येएए.. मोटे मोटे आंसू
        ना ना ये उस थाप के नहीं
        ये तो उस बड़े फुग्गे के फूटने से थे….

        बहुत याद आती हैं बचपन की बातें…

        स्कूल से घर के अन्दर भी,
        आना नहीं हो पाता था कि-
        रूई जैसे उड़ते बाबा का खेल
        पहले तो कड़ी मेहनत,
        उचक-उचक के पकड़नें में…
        उतनी ही फिर फूँक कर
        ऊँचा उड़ाना उन्हें…
        घण्टों चल जाता था खेल

        कितना अल्हड़,पागलपन सा बचपन..
        सो,बहुत याद आती हैं बचपन की बातें…

        कितना काम था तब,
        छोटे-छोटे बरतन में,
        सबका झूठा-मूठा खाना बनाना……
        फिर भी बाबा को स्वाद आया
        था भी तो दादी के हाथों बना..
        दादी नहीं समझे???
        नेह की जिनकी मैं आदी सी थी..
        अठखेलियों में उनकी, मैं दादी ही थी..

        अब भीग रहीं हैं इन यादें में आंखें,
        बहुत याद आ रहीं हैं ये बचपन की बातें..

        वो किसी की डांट में टपकते आंसू,
        और माँ के आंचल का कोना,
        नाराज होकर जमीन पे लेटूँ..
        हमेशा सुबह अपने बिस्तर पे होना………….

        इतनें मीठे ना दिन हैं अब
        ना मासूम इतनी कभी होंगी रातें.
        सच!! बहुत याद आती है अब ये बचपन की बातें
        ये बचपन की बातें..

        पसंद करें

      3. सुनो…
        कल तुम्हारे रूखेपन की ठण्ड से,
        कांपती रही पूरे दिन…
        तुम देख ही लेते एक बार
        सो आई तो कई दफा,
        तुम्हारे दिल के कमरे में…

        कोशिश भी की………

        कि चूड़ियों की खनक से,
        तुम्हे बोल दूँ कि,
        अच्छे नहीं लगते यूँ
        रूठे-रूठे से तुम…..
        पर मेरे प्यार में टकी,
        तुम्हारे शर्ट की टूटी बटन पर
        नाराजगी दिखाने का,
        तुम्हे, जब बहाना ढ़ूढते देखा..
        तब तुम्हारे पहले वाले प्यार की,
        गर्माहट भरा स्वेटर पहनकर,
        तुम्हारे दिल के कमरे से बाहर आ गई…..

        @p.m.@✍

        पसंद करें

  12. safalata ka marg,aaj me aap ku safalata ke bare me batana chahata hu.ju yuva ladakeu ku apni padae me safalata nhi milati hai.unhe sym par bharosa hota hai.ki vah pepar ya nukari me pass ho jaege paranto safalata unke kadam nhi chumati hai.har bar asafalata milati hai.tu vah uas se gvarahe nhi,kahate hai n,”rasata kitana bhi bada hu ek_n din us manjil par pahuch jata hai jis par safalata aap ka entjaar kar rahi hai”aap apne kary ku lagatar karate rahe,aur mehnat karate rahe,jab tak aap ku apne kary me safalata nhi milati,

    पसंद करें

  13. भाई मुझे भी अपनी ग़ज़ल आपकी वेबसाइट पे प्रकाशित करवानी है।
    मैं अपनी ग़ज़ल आप तक कैसे भेजू।।editor_team@literatureinindia ये email invailid बता रहा है।
    कृपया शीघ्र सूचित की कृपा करें।

    पसंद करें

    1. मान्यवर!

      रचना प्राप्त होने के बाद प्रकाशनार्थ, प्रकाशन मंडल को प्रेषित की जाती है।

      अगर रचना प्रकाशन योग्य सटीक होगी तो प्रकाशित की जाएगी, अन्यथा की स्थिति में ईमेल द्वारा सूचना प्रदान की जाएगी।

      इस प्रक्रिया में 15-20 दिन का समय अपेक्षित है क्योंकि बाक़ी रचनाकारों से प्राप्त रचनाओं का आकलन आवश्यक है।

      सबसे ज़रूरी सूचना यह कि रचना इसी वेबसाइट पर प्रकाशित की जाएगी एवं उम्मीद है कि आपने इसी हेतु प्रेषित की है|

      सादर!
      लिटरेचर इन इंडिया टीम

      पसंद करें

  14. सर नमस्कार
    मै एक विधालय का छाञ हु जो विघालय मे हुई प्नतियोगिता मे प्नस्तुत कविता को आपकी पुस्तक मे प्नकाशित कराना चाहता हु
    आपकी सहमति पर मैरा अगला विचार
    धन्यवाद!
    Contact:-7297992760

    पसंद करें

  15. नाराज हो क्या हमसे,हमको ये बता दो न
    जो खता हुई है हमसे,हमको ये जता दो न
    ये दिल तो सिर्फ आपका है, ये हमारा वादा है
    आप भी बता दो न, क्या आपका इरादा है
    हमको अपने दिल मे बसा लो, ये दिल की चाहत है
    आप ही बता दो न,क्या आपके दिल मे बसने की ईजाजत है

    बृजेन्द्र कुशवाहा
    गरौठा झाँसी

    पसंद करें

  16. महोदय , मैन 25 नवंबर 2017 को ” महबूबा की विदाई ” उन्वान की एक ग़ज़ल आपको भेजी थी।उसके बारे में अभी तक मुझे कोई सूचना प्राप्त नही हुई।कृपया कुछ जानकारी देने का कष्ट करें ।

    पसंद करें

  17. ठाकुर दीपक जी
    नमस्कार!
    महाशय मैं नियमित रूप से कविता लिख रहा हूँ ।
    मेरी सभी कविताएं मौलिक एवं अप्रकाशित हैं।
    मैं अपनी कविताएं प्रकाशन हेतु कैसे सम्प्रेषित करूं ?
    कृपया मेरा मार्गदर्शन कराये।

    पसंद करें

  18. 〰〰〰〰〰〰〰〰
    साथियो रेलवे में 10 साल नोकरी
    करने पर अब मन हुआ गम्भीर।
    〰〰〰〰〰〰〰〰
    इस रेलवे में कर्मचारियों की
    क्यूँ अलग अलग तकदीर।।
    〰〰〰〰〰〰〰
    किसी को बिन माँगे मोती
    किसी की सुनवाई नही होती।
    〰〰〰〰〰〰〰
    रेलपथ वालो से ही लहराती है।✍,
    स्वार्थी संगठनों की हरी भरी खेती।
    〰〰〰〰〰〰〰〰
    क्या सोच के सिस्टम ने ✍✍
    बनाई ये दो वैरंग तस्वीर ।✍
    〰〰〰〰〰〰〰
    एक ही परीक्षा पास करने
    वालो की क्यूँ लिखी अलग
    अलग तकदीर।✍✍✍
    〰〰〰〰〰〰〰
    कुछ किस्मत वाले PP बन कर
    टाई कोट का सुख अमृत पीते है।
    कुछ ट्रैकमैन दिल पर पत्थर रख
    कर जीवन अपना जीते है।
    〰〰〰〰〰〰〰
    तपती दोपहरी में काम करें
    फिर भी अपमानित से जीते है।
    ट्रैफिक और कॉमर्शियल वालो
    के मन का पंछी आकाश उड़े✍
    फिर ट्रैकमैन पैरो में 20
    किलोमीटर की पेट्रोलिंग
    पांवो में जँझिर बने।।✍
    ➰➰➰➰➰➰➰➰➰
    आपका साथी
    🌷चेतराम मीणा🌷
    🌷भरुच वड़ोदरा🌷

    पसंद करें

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.