जीवनसंगिनी – मनीष कुमार

संग संग चलो मेरी जीवनसंगनी रुको नहीं थको नहीं ओ मेरी हृदयनयनी अपलक नयनों के तार जुड़े हैं तेरे मेरे सांसों को बेजार मत करो मृगनयनी संग संग चलो मेरी जीवनसंगनी आसमान की ऊंचाई से , जीवन की गहराई तक धूपो की अगुवाई से , रात्रि की विदाई तक स्वप्नों की अनुभूति से, हकीकत की सच्चाई तक फूलों की पंखुिड़यों से, काँटों  की चुभन तक … पढ़ना जारी रखें जीवनसंगिनी – मनीष कुमार

मनीष कुमार, रांची, झारखण्ड

सबका साथ

सबका साथ सबका हाथ मिलकर बनाएंगे एक नया इतिहास कोई वर्ग न छूटे कोई धर्म के नाम पर न लूटे जीवन की हर सांस पर क़दमों के हर ताल पर सुनेगे और सुनायेंगे हर बात पर जोर लगाएंगे पीछे मुड़कर न आयेंगे मिलकर माशल जलाएंगे एक अनुपम भारत बनाएंगे जहां प्रगति धारा की होगी प्रवाह हर निश्चल मानस का होगा प्रवास न धर्म होगा न … पढ़ना जारी रखें सबका साथ