हिन्दी और मैथिली के प्रसिद्ध कवि एवं कहानीकार राजकमल चौधरी के जन्मदिवस पर विशेष

अँधेरे में, (गर्म दूध पीती हुई) बिल्ली का चेहरा नहीं देख पाता हूँ, सिर्फ आँखें। हर रात इसी वक्त बिजली कट जाती है।   "… चाय तैयार है, आओ पिएँ…"     एक प्रश्न हजार उत्तर— “मैंने सूरज से पूछा—धरती कब आग का गोला बन जाएगी ? मुझसे सूरज ने पूछा—तुम बरफ-घर में सोये कब … पढ़ना जारी रखें हिन्दी और मैथिली के प्रसिद्ध कवि एवं कहानीकार राजकमल चौधरी के जन्मदिवस पर विशेष

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