हम रेडिकल संतानें – डॉ. चित्रलेखा अंशु

रेडिकल होना जूझना है वस्तुस्थिति के विपरीत पेंडुलम होना भी है आधुनिकता और परम्परा के बीच। न तो पूर्णतः सम्मानित और न ही नकारने योग्य हम रेडिकल संतानें दुनियां से लड़ते-लड़ते खुद ही हो जाते हैं संक्रमित क्योंकि हमारे वाद को न कोई पचा पाता है न ही ठुकरा पाता है। हमारे तर्कपूर्ण विचार सामने … पढ़ना जारी रखें हम रेडिकल संतानें – डॉ. चित्रलेखा अंशु

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