Dekho to Shabdo me| Literature in India

देखो तो शब्दों में – मीनाक्षी वशिष्ठ

देखो तो शब्दों में कितना जादू है! मेरे शब्द मुझे उस लोक में ले आये हैं   जहाँ सब सुन्दर हैं! यहाँ हर और बिखरते रुप, रंग, रस, राग के झरने यहाँ हर पल उत्सव है दुख की तो परछाई भी नहीं जीवन फूट-फूट पड़ता है । देखो तो शब्दों में कितना जादू है! मैं जब लिखती हूं ‘प्रेम’ रोम-रोम पुलकित हो उठता है मैं … पढ़ना जारी रखें देखो तो शब्दों में – मीनाक्षी वशिष्ठ

मेरे सपने- जूनून भी सुकून भी…

पलकों के पालने में सजा है एक सपना, जब मैं जागती तो वो भी जागता, जब मैं सोती तो भी वो जागता ।     एक दिन पूछा मैंने उसको – नींद नहीं आती तुमको ? तो कहा सपने ने मुस्कुराते हुए ,  कौन आता है रोज़ तुम्हे उठाने के लिए ! तू जब भी है सोती , मेरे ही बीज बोती। और जब जागती , तो … पढ़ना जारी रखें मेरे सपने- जूनून भी सुकून भी…

विरहणी

भोर में ही विरहणी आंगन बुहारती, कर्मलीना प्रतिपल सोचती विचारती, तक रही है द्वार को दृष्टि है अनिमेष, धिक्कार वह जीवन जो वेदनावशेष। उर ज्वलित विरहाग्नि से भस्म होती देह, और भड़काते बरस नयन रूपी मेह, पिय मिलन का ही रहा बस अभीप्सित शेष, धिक्कार वह जीवन जो वेदनावशेष। थी भरी हर सौख्य से कंत थे जब पास, है यही जीवन बचा चल रही बस … पढ़ना जारी रखें विरहणी

अधूरे प्रेम की पूरी दुनिया – अंकिता रासुरी

ओ मेरे साथी तुम मुझे बहुत अच्छे लगते हो मैं कर सकती हूँ तुमसे अधूरा प्रेम क्योंकि बहुत कुछ घट जाने के बाद अधूरा हिस्सा ही बचा रह सकता है किसी के जीवन मे पर मैं अब करना भी नहीं चाहती पूरा प्रेम मैं जानती हूँ वह प्रेम हो सकता है खतरनाक किसी भी स्त्री के लिए वह प्रेम बना सकता है किसी स्त्री को … पढ़ना जारी रखें अधूरे प्रेम की पूरी दुनिया – अंकिता रासुरी

सांझ ढले फिर आया सूरज दो पल बतियाने

दिन भर आग बबूला होकर
अहंकार का बोझा ढोकर
सांझ ढले फिर आया सूरज
दो पल बतियाने
नदिया की कलकल धारा से
शीतलता पाने पढ़ना जारी रखें सांझ ढले फिर आया सूरज दो पल बतियाने

Yamraj

प्रेत का बयान – नागार्जुन

“ओ रे प्रेत -”
कडककर बोले नरक के मालिक यमराज
-“सच – सच बतला !
कैसे मरा तू ?
भूख से , अकाल से ?
बुखार कालाजार से ?
पेचिस बदहजमी , प्लेग महामारी से ?
कैसे मरा तू , सच -सच बतला !”
खड़ खड़ खड़ खड़ हड़ हड़ हड़ हड़
काँपा कुछ हाड़ों का मानवीय ढाँचा
नचाकर लंबे चमचों – सा पंचगुरा हाथ
रूखी – पतली किट – किट आवाज़ में
प्रेत ने जवाब दिया – पढ़ना जारी रखें प्रेत का बयान – नागार्जुन

Love Poem

दोनों ओर प्रेम पलता है – मैथिलीशरण गुप्त

दोनों ओर प्रेम पलता है।
सखि, पतंग भी जलता है हा! दीपक भी जलता है!

सीस हिलाकर दीपक कहता–
’बन्धु वृथा ही तू क्यों दहता?’
पर पतंग पड़ कर ही रहता
कितनी विह्वलता है!
दोनों ओर प्रेम पलता है। पढ़ना जारी रखें दोनों ओर प्रेम पलता है – मैथिलीशरण गुप्त