पेड़ की आत्‍मा – जगदीश शर्मा सहज

पेड़ की आत्‍मा - Jagdish Sharma Sahaj

मैं नश्वर था पर तुम्हारे हाथों मृत्यु का अधिकारी नहीं मैं बूढ़ा अवश्य था पर जनजीवन का अपकारी नहीं   मैं जब बच्चा था तुम पैदा ही नहीं हुए थे धरती पर न यह भीड़भाड़ थी, न शोर था, जीवन था प्रगति पर     मैं मौन रहकर तुम्हें देखता था निस्तब्ध सा खड़ा था … पढ़ना जारी रखें पेड़ की आत्‍मा – जगदीश शर्मा सहज

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प्रदूषण

आँख में चुभ रहा, आज प्रतिक्षण यहाँ जान लेकर रहेगा प्रदूषण यहाँ ! रोज बढ़ता हुआ वाहनों का धुआँ वायु में घुल रहा जहर भीषण यहाँ ! उजड़ते वन यहाँ जानता है ख़ुदा चीड़ का हो रहा रोज खण्डन यहाँ ! परत ओज़ोन का तीव्र अवक्षय यहाँ ऊष्मा लाँघता व्योम घर्षण यहाँ ! कोल की … पढ़ना जारी रखें प्रदूषण

बढ़े चलो -बढ़े चलो

बढ़े चलो -बढ़े चलो ! प्रचंड वेग से चलो , अनन्त जिगीषा लिए सत्य पे अड़े चलो ! गजारि सी दहाड़ से सिंहनाद घोर कर, दंभ कीर्ण कूट -कर सूर से बढ़े चलो !! न चाटुकारिता सहो न अपचार को सहो, न अर्थना करो यहाँ स्वम् ही खड़े चलो ! ओर छोर तक कदन न्याय … पढ़ना जारी रखें बढ़े चलो -बढ़े चलो