जयदोल – सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’

लेफ्टिनेंट सागर ने अपना कीचड़ से सना चमड़े का दस्ताना उतार कर, ट्रक के दरवाजे पर पटकते हुए कहा,”गुरूंग, तुम गाड़ी के साथ ठहरो, हम कुछ बन्दोबस्त करेगा।” गुरूंग सड़ाक से जूतों की एड़ियाँ चटका कर बोला,”ठीक ए सा’ब -” साँझ हो रही थी। तीन दिन मूसलाधार बारिश के कारण नवगाँव में रुके रहने के बाद, दोपहर को थोड़ी देर के लिए आकाश खुला तो … पढ़ना जारी रखें जयदोल – सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’