केदारनाथ सिंह के जन्मदिवस पर विशेष प्रस्तुति

Kedarnath Singh

केदारनाथ सिंह (७ जुलाई १९३४ – १९ मार्च २०१८), हिन्दी के सुप्रसिद्ध कवि व साहित्यकार थे। वे अज्ञेय द्वारा सम्पादित तीसरा सप्तक के कवि रहे। भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा उन्हें वर्ष २०१३ का ४९वां ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया था। वे यह पुरस्कार पाने वाले हिन्दी के १०वें लेखक थे। केदारनाथ सिंह का जन्म ७ जुलाई … पढ़ना जारी रखें केदारनाथ सिंह के जन्मदिवस पर विशेष प्रस्तुति

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महाकवि नागार्जुन की जयंती पर विशेष

Nagarjun_Poet

नागार्जुन (30जून 1911- 5 नवम्बर 1998) हिन्दी और मैथिली के अप्रतिम लेखक और कवि थे। अनेक भाषाओं के ज्ञाता तथा प्रगतिशील विचारधारा के साहित्यकार नागार्जुन ने हिन्दी के अतिरिक्त मैथिली संस्कृत एवं बाङ्ला में मौलिक रचनाएँ भी कीं तथा संस्कृत, मैथिली एवं बाङ्ला से अनुवाद कार्य भी किया। नागार्जुन का जन्म १९११ ई० की ज्येष्ठ … पढ़ना जारी रखें महाकवि नागार्जुन की जयंती पर विशेष

उठो प्रतिभावान स्वर उठो

सुलग रहे अदम्य मन का ज्वाला है घुल रहे असंख्य प्रवीणता का हवाला है बिना घिसे चमक क्या आई है चमकहीन  सभ्यता हमने लाई है प्रेरणा नहीं उनमें, मैं प्रतिशतता भरते जाऊ बिना जले बाती में, मै प्रकाश कहाँ से लाऊ विरले बिना स्वृण के, चमके होगें संकेतन दीप जगत में, जहाँ दमके होगें भूले … पढ़ना जारी रखें उठो प्रतिभावान स्वर उठो

क्या अकेला नहीं कोई सफल होता?

  क्या अकेला नहीं कोई सफल होता? आज नहीं क्या हो सकता जो कल होता, सच्चा प्रयत्न  नहीं   कभी   विफल होता, क्या एकता में ही केवल बल होता? क्या अकेला नहीं कोई सफल होता? बौने बामन ने अकेले राजा बलि को बांधा था, तीन पग में नभ, महि और स्वर्ग तक को लांघा था। एक … पढ़ना जारी रखें क्या अकेला नहीं कोई सफल होता?

हम रेडिकल संतानें – डॉ. चित्रलेखा अंशु

रेडिकल होना जूझना है वस्तुस्थिति के विपरीत पेंडुलम होना भी है आधुनिकता और परम्परा के बीच। न तो पूर्णतः सम्मानित और न ही नकारने योग्य हम रेडिकल संतानें दुनियां से लड़ते-लड़ते खुद ही हो जाते हैं संक्रमित क्योंकि हमारे वाद को न कोई पचा पाता है न ही ठुकरा पाता है। हमारे तर्कपूर्ण विचार सामने … पढ़ना जारी रखें हम रेडिकल संतानें – डॉ. चित्रलेखा अंशु

वेटिकनसिटी – सविता मिश्रा ‘अक्षजा’

Vetican City - Short Story by Savita Mishta Akshaja

"मेरी बच्ची ! तू सोच रही होगी कि मैंने इस तीसरे अबॉर्शन के लिए सख्ती से मना क्यों नहीं किया !!" ओपीडी के स्ट्रेचर पड़ी बिलखती हुई माँ ने अपने पेट को हथेली से सहलाते हुए कहा। पेट में बच्ची की हल्की-सी हलचल हुई। "तू कह रही होगी कि माँ डायन है ! अपनी ही … पढ़ना जारी रखें वेटिकनसिटी – सविता मिश्रा ‘अक्षजा’

मेरे सपने- जूनून भी सुकून भी…

पलकों के पालने में सजा है एक सपना, जब मैं जागती तो वो भी जागता, जब मैं सोती तो भी वो जागता ।     एक दिन पूछा मैंने उसको - नींद नहीं आती तुमको ? तो कहा सपने ने मुस्कुराते हुए ,  कौन आता है रोज़ तुम्हे उठाने के लिए ! तू जब भी है सोती … पढ़ना जारी रखें मेरे सपने- जूनून भी सुकून भी…