झरने लगे नीम के पत्ते बढ़ने लगी उदासी मन की -केदारनाथ सिंह

झरने लगे नीम के पत्ते बढ़ने लगी उदासी मन की, उड़ने लगी बुझे खेतों से झुर-झुर सरसों की रंगीनी, धूसर धूप हुई मन पर ज्यों — सुधियों की चादर अनबीनी, दिन के इस सुनसान पहर में रुक-सी गई प्रगति जीवन की । साँस रोक कर खड़े हो गए लुटे-लुटे-से शीशम उन्मन, चिलबिल की नंगी बाँहों … पढ़ना जारी रखें झरने लगे नीम के पत्ते बढ़ने लगी उदासी मन की -केदारनाथ सिंह

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देवनागरी

देवनागरी एक लिपि है जिसमें अनेक भारतीय भाषाएँ तथा कई विदेशी भाषाएं लिखीं जाती हैं। देवनागरी बायें से दायें लिखी जाती है, इसकी पहचान एक क्षैतिज रेखा से है जिसे 'शिरिरेखा' कहते हैं। संस्कृत, पालि, हिन्दी, मराठी, कोंकणी, सिन्धी, कश्मीरी, डोगरी, नेपाली, नेपाल भाषा (तथा अन्य नेपाली उपभाषाएँ), तामाङ भाषा, गढ़वाली, बोडो, अंगिका, मगही, भोजपुरी, मैथिली, संथाली आदि भाषाएँ देवनागरी में लिखी जाती हैं। इसके अतिरिक्त कुछ स्थितियों में गुजराती, पंजाबी, बिष्णुपुरिया मणिपुरी, रोमानी और उर्दू भाषाएं भी देवनागरी में लिखी जाती हैं। देवनागरी विश्व में सबसे … पढ़ना जारी रखें देवनागरी

एक थी गौरा – अमरकांत

लंबे कद और डबलंग चेहरे वाले चाचा रामशरण के लाख विरोध के बावजूद आशू का विवाह वहीं हुआ। उन्होंने तो बहुत पहले ही ऐलान कर दिया था कि 'लड़की बड़ी बेहया है।'   आशू एक व्यवहार-कुशल आदर्शवादी नौजवान है, जिस पर मार्क्स और गाँधी दोनों का गहरा प्रभाव है। वह स्वभाव से शर्मीला या संकोची … पढ़ना जारी रखें एक थी गौरा – अमरकांत

होली और बुरा ना मानो महोत्सव

होली, भारत का प्रमुख त्यौहार है, क्योंकि इस दिन पूरे भारत मे बैंक होली-डे  रहता है अर्थात अवकाश रहता है जिसकी वजह से बैंक में घोटाले होने की संभावना नही रहती है, मतलब होली के दिन केवल आप रंग लगा सकते है, चूना लगाना मुश्किल होता है। इसी कारण से होली देश की समरसता के … पढ़ना जारी रखें होली और बुरा ना मानो महोत्सव

डर के गठबंधन पर दूरगामी प्रश्नचिन्ह

लगभग दो दशक यानि 1993 के बाद, देश के दो सबसे बड़े क्षेत्रीय दल अपने अस्तित्व को बचाने की कवायद में फिर से एक हो चले हैं| बसपा के संस्थापक कांशीराम और मुलायम सिंह यादव की दोस्ती जब परवान चढ़ी थी तो उस वक़्त मुलायम सिंह यादव द्वारा अस्तित्व में आई समाजवादी पार्टी उत्तरप्रदेश की … पढ़ना जारी रखें डर के गठबंधन पर दूरगामी प्रश्नचिन्ह

ग्यारह सितंबर के बाद – अनवर सुहैल

ग्यारह सितंबर के बाद करीमपुरा में एक ही दिन, एक साथ दो बातें ऐसी हुर्इं, जिससे चिपकू तिवारी जैसे लोगों को बतकही का मसाला मिल गया। अव्वल तो ये कि हनीफ ने अपनी खास मियाँकट दाढ़ी कटवा ली। दूजा स्कूप अहमद ने जुटा दिया... जाने उसे क्या हुआ कि वह दँतनिपोरी छोड़ पक्का नमाजी बन … पढ़ना जारी रखें ग्यारह सितंबर के बाद – अनवर सुहैल

जीवनसंगिनी – मनीष कुमार

संग संग चलो मेरी जीवनसंगनी रुको नहीं थको नहीं ओ मेरी हृदयनयनी अपलक नयनों के तार जुड़े हैं तेरे मेरे सांसों को बेजार मत करो मृगनयनी संग संग चलो मेरी जीवनसंगनी आसमान की ऊंचाई से , जीवन की गहराई तक धूपो की अगुवाई से , रात्रि की विदाई तक स्वप्नों की अनुभूति से, हकीकत की … पढ़ना जारी रखें जीवनसंगिनी – मनीष कुमार