देखो तो शब्दों में – मीनाक्षी वशिष्ठ

Dekho to Shabdo me| Literature in India

देखो तो शब्दों में कितना जादू है! मेरे शब्द मुझे उस लोक में ले आये हैं   जहाँ सब सुन्दर हैं! यहाँ हर और बिखरते रुप, रंग, रस, राग के झरने यहाँ हर पल उत्सव है दुख की तो परछाई भी नहीं जीवन फूट-फूट पड़ता है । देखो तो शब्दों में कितना जादू है! मैं … पढ़ना जारी रखें देखो तो शब्दों में – मीनाक्षी वशिष्ठ

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दरवाजे और खिड़कियाँ – मीनाक्षी वशिष्ठ

Darwaje aur Khidkiyan - Minakshi Vashisth

बागों के पहरेदार से होते दरवाजे और कलियों सी नाजुक होतीं खिड़कियाँ कितना भी मन को बहलाएँ कितना भी सुख-दुःख बांटे दरवाजों सी समझदार कभी बन नही पातीं खिड़कियाँ ! हर मौसम में अविचल रहते दरवाजे इक झोके से सिहर उठती खिड़कियाँ ये खुल जाती हैं मौसम में चुपके-चुपके पुरवाई में महक उठती  खिड़कियाँ! बंधन … पढ़ना जारी रखें दरवाजे और खिड़कियाँ – मीनाक्षी वशिष्ठ