आलसस्य परम सुखम

प्राचीन काल से ही आलस को सामाजिक और व्यक्तिगत बुराई माना जाता रहा हैं. “जो सोवत हैं, वो खोवत हैं” जैसी कहावतो के माध्यम से आलसी लोगो को धमकाने और “अलसस्य कुतो विद्या” जैसे श्लोको के ज़रिये उनको सामाजिक रूप से ज़लील करने /ताने कसने के प्रयास अनंतकाल से जारी हैं. लेकिन फिर भी आज तक (चैंनल नहीं ) आलस और आलसियों का वजूद “सेट … पढ़ना जारी रखें आलसस्य परम सुखम

कबहू उझकि कबहू उलटि !

कबहू उझकि कबहू उलटि ! (मधुगीति १६०३०६ ब) कबहू उझकि कबहू उलटि, ग्रीवा घुमा जग कूँ निरखि; रोकर विहँसि तुतला कभी, जिह्वा कछुक बोलन चही ! पहचानना आया अभी, है द्रष्टि अब जमने लगी; हर चित्र वह देखा किया, ग्रह घूम कर जाना किया ! लोरी सुने बतियाँ सुने, गुनगुनाने उर में लगे; कीर्तन भजन मन भावने, लागा है शिशु सिख बूझने ! नानी कहानी … पढ़ना जारी रखें कबहू उझकि कबहू उलटि !

बेटी की विदाई

बेटी की विदाई आती है बड़ी किस्मत से ये घड़ियाँ विदाई की खुशनसीबों को मिलती है ये लड़ियाँ विदाई की बाबुल के अंगना की बुलबुल जायेगी परदेश कैसे देख पाएंगी अखियाँ ये रतियाँ विदाई की किसने बनाई ये रीत रिवायतें ह्रदयविदारक सी कैसे समेट पायेगी बिटिया ये कलियां विदाई की खुशियों का मेला लग रहा है हरसू  आँगन में माँ कैसे संभाले अश्को की बगिया … पढ़ना जारी रखें बेटी की विदाई

चरित्रवान भैंस, गर्भवती बुद्धिजीवी

एक थे सुदामा राय..जिला बलिया द्वाबा के भूमिहार,एक मेहनती किसान,एक बड़े खेतिहर. कहतें हैं उनके पास दो गाय और एक भैंस थी.. एक साँझ की बात है..राय साहेब गाय भैंस को खिला पिलाकर झाड़ू लगा रहे थे.तब तक क्षेत्र के एक प्रसिद्ध पशु व्यापारी आ धमके.. व्यापारी जी ने भैंस जी को बड़े प्यार से देखा..आगे-पीछे,दांये-बांये,ऊपर-नीचे…मानों वो भैंस नहीं साक्षात होने वाली महबूबा को देख … पढ़ना जारी रखें चरित्रवान भैंस, गर्भवती बुद्धिजीवी

आतंकी को चीर देने वाली रुखसाना को ‘घर’ में ही खतरा!

एक ऐसी लड़की जिस ने घर में जबरन घुस आए लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी सगठन के टॉप कमांडर को कुल्हाड़ी से काट डाला था, आज वो अपनी ही जान को लेकर चिंता में है। राष्ट्रपति से बहादुरी का सम्मान पाने वाली राजौरी की बहादुर रुखसाना कौसर को अपने ही पति से अब जान का खतरा है। रुखसार ने जो आपबीती सुनाते हुए कहा कि एक तरफ … पढ़ना जारी रखें आतंकी को चीर देने वाली रुखसाना को ‘घर’ में ही खतरा!

कर्ज में डूबे किसान और गरीब आत्महत्या कर रही और बैंकों ने माफ किया कॉरपोरेट जगत का 1 लाख करोड़ का लोन!

अमर उजाला न्यूज़ के अनुसार रिजर्व बैंक की तरफ से कारोबार जगत के एनपीए को लेकर ऐसे आंकड़े जारी किए गए हैं, जो किसी को भी चौंकाने के लिए काफी हैं। रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर केसी चक्रबर्ती ने बैंकों की होने वाली सालाना कॉन्फ्रेंस में बताया कि पिछले 13 सालों में बैंकों ने कॉरपोरेट को दिया करीब 1 लाख करोड़ रुपए का लोन माफ … पढ़ना जारी रखें कर्ज में डूबे किसान और गरीब आत्महत्या कर रही और बैंकों ने माफ किया कॉरपोरेट जगत का 1 लाख करोड़ का लोन!

खुलासा – 251 रूपये का फ़ोन आपके साथ है धोखाधड़ी! कंपनी का तीन महीने पहले ही हुआ रजिस्ट्रेशन!

देश का सबसे सस्ते स्मार्ट फ़ोन ”फ्रीडम -251” बुकिंग होने से पहले ही संदेह के घेरे में आ गया है। सोशल मीडिया में छाने के बाद जैसे ही बुकिंग की प्रक्रिया का वक़्त शुरू हुआ वैसे ही रिंगिंग बेल्स कंपनी की वेबसाइट ही क्रेश हो गई। अखबारों में कंपनी के विज्ञापनों में दिए गए कई फोन नंबरों से कोई संपर्क नही हो पा रहा है। … पढ़ना जारी रखें खुलासा – 251 रूपये का फ़ोन आपके साथ है धोखाधड़ी! कंपनी का तीन महीने पहले ही हुआ रजिस्ट्रेशन!

मैं कन्हैया कुमार भारतीय संविधान में पूर्ण विश्वास रखता हूँ। एक युवा को अपने बचाव का मौका जरूर दिया जाना चाहिए।

दिल्ली पुलिस ने कन्हैया की हिंदी में लिखी अपील को सार्वजनिक किया है जिसमें कन्हैया ने अपना और गांव का नाम बताते हुए लिखा है कि मैं भारत के संविधान में विश्वास रखता हूं। मेरा ये सपना है कि इसे अक्षरशः लागू करने में अपना हर संभव योगदान कर सकूं। मैं भारत की एकता और अखंडता को मानता हूं ‌और इसके विपरित किसी भी असंवैधानिक … पढ़ना जारी रखें मैं कन्हैया कुमार भारतीय संविधान में पूर्ण विश्वास रखता हूँ। एक युवा को अपने बचाव का मौका जरूर दिया जाना चाहिए।

हम सिर्फ एक ही हिन्दू राष्ट्र है इस दुनिया में फिर हम ये सेक्युलर राष्ट्र का तमगा ले कर क्यों घूम रहे है? इन गद्दारों को पनपने देने के लिए?

“ये है कन्हैया…एक वामपंथी नेता से पुरस्कार प्राप्त करते हुए…और यही से शायद इनकी वामपंथी विचारधारा की नींव पड़ी…ऐसा नही है कि मेरा संपर्क वामपंथियों से कभी नहीं रहा। बहुत करीब से जानता हूँ मैं वाम पंथी विचार धारा को| आज जहाँ कन्हैया खड़ा हुआ है…कभी उस जगह मैं भी खड़ा था और जानते है मुझे पुरस्कार में क्या मिला था- मार्क्स, एंगेल्स की बुक्स! … पढ़ना जारी रखें हम सिर्फ एक ही हिन्दू राष्ट्र है इस दुनिया में फिर हम ये सेक्युलर राष्ट्र का तमगा ले कर क्यों घूम रहे है? इन गद्दारों को पनपने देने के लिए?

इंडिया न्यूज ने चलाया कन्हैया का फ़र्जी वीडियो, दफ़्तर पहुँची पूरी पुलिस फ़ोर्स

बुधवार की रात एक दिलचस्प घटनाक्रम में इंडिया न्यूज़ के नॉएडा स्थित कार्यालय में अचानक पुलिस पहुँच गई जिससे चैनल में हडकंप मच गया. सूत्रों के मुताबिक़ बुधवार की रात प्राइम टाइम में इंडिया न्यूज़ ने जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार का एक वीडियो दिखाया था जिसमें बताया गया था कि वो कश्मीर की आज़ादी का नारा लगा रहा है. इस वीडियो को … पढ़ना जारी रखें इंडिया न्यूज ने चलाया कन्हैया का फ़र्जी वीडियो, दफ़्तर पहुँची पूरी पुलिस फ़ोर्स

रिटायर्ड का दर्द – कवि द्रौणाचार्य दुबे

मै बुजुर्ग हूँ रिटायर्ड हूँ पेंशन पर जीता हूँ पेंशन क्या इससे ज्यादा तो टेंशन पर जीता हूँ कोल्हू के बैल-सा घर के सारे काम कर जाता हूँ बदले में सिर्फ अपमान के शब्द ही पाता हूँ हूँ जिँदा मगर मर मर के ही जीता हूँ रोज अपमान के आँसू -गम पीता हूँ राम -सीता से बेटे बहू को मैने है पाया अपने को मिटा … पढ़ना जारी रखें रिटायर्ड का दर्द – कवि द्रौणाचार्य दुबे

एक अजन्मा, अनसुना सा गीत – नंदकिशोर ‘सौम्य’

किसी वीरान हवेली के, अंधेरे कमरे के कुन्ने में एक अजन्मा, अनसुना सा गीत पड़ा कराह रहा है ! वो गीत जिसने करुण क्रंदन से निर्मित शब्दों के बिस्तर की सेज सजाई है ! वो गीत, जो अनदेखे तमाम आँसू अपनी सूखी आँखों में छिपाए बैठा है ! वो गीत, जिसके हर शब्द में — विरह है, विलाप है, एक अधूरा सा मिलाप है… धूप … पढ़ना जारी रखें एक अजन्मा, अनसुना सा गीत – नंदकिशोर ‘सौम्य’

चूहा और मैं – हरिशंकर परसाई

चाहता तो लेख का शीर्षक ”मैं और चूहा” रख सकता था। पर मेरा अहंकार इस चूहे ने नीचे कर दिया। जो मैं नहीं कर सकता, वह मेरे घर का यह चूहा कर लेता है। जो इस देश का सामान्य आदमी नहीं कर पाता, वह इस चूहे ने मेरे साथ करके बता दिया। इस घर में एक मोटा चूहा है। जब छोटे भाई की पत्नी थी, … पढ़ना जारी रखें चूहा और मैं – हरिशंकर परसाई

एक थी माया – विजय कुमार सप्पत्ति

:::: १९८० :::: ::: १ ::: मैं सर झुका कर उस वक़्त बिक्री का हिसाब लिख रहा था कि उसकी  धीमी आवाज सुनाई दी, “अभय, खाना खा लो” ,मैंने सर उठा कर उसकी  तरफ देखा, मैंने उससे कहा ,” माया , मै आज डिब्बा नहीं लाया हूं ।” दरअसल सच तो यही था कि  मेरे घर में उस दिन खाना नहीं बना था । गरीबी … पढ़ना जारी रखें एक थी माया – विजय कुमार सप्पत्ति

आधुनिक हिंदी सहित्य का इतिहास – पूर्णिमा वर्मन

हिंदी साहित्य का आधुनिक काल भारत के इतिहास के बदलते हुए स्वरूप से प्रभावित था। स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रीयता की भावना का प्रभाव साहित्य में भी आया। भारत में औद्योगीकरण का प्रारंभ होने लगा था। आवागमन के साधनों का विकास हुआ। अंग्रेज़ी और पाश्चात्य शिक्षा का प्रभाव बढ़ा और जीवन में बदलाव आने लगा। ईश्वर के साथ साथ मानव को समान महत्व दिया गया। भावना … पढ़ना जारी रखें आधुनिक हिंदी सहित्य का इतिहास – पूर्णिमा वर्मन

ईसुरी की अलौकिक फाग नायिका रजऊ और बुन्देली परम्पराएँ – आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’

बुन्देली माटी के यशस्वी कवि ईसुरी की फागें कालजयी हैं. आज भी ग्राम्यांचलों से लेकर शहरों तक, चौपालों से लेकर विश्वविद्यालयों तक इस फागों को केंद्र में रखकर गायन, संगोष्ठियों आदि के आयोजन किये जाते हैं. ईसुरी की फागों में समाज के अन्तरंग और बहिरंग दोनों का जीवंत चित्रण प्राप्य है. मानव जीवन का केंद्र नारी  होती है. माँ, बहिन, दादी-नानी, सखी, भाभी, प्रेयसी, पत्नी, साली, … पढ़ना जारी रखें ईसुरी की अलौकिक फाग नायिका रजऊ और बुन्देली परम्पराएँ – आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’

रंगों से रंगी दुनिया – संजय वर्मा ‘दृष्टि’

मैने देखी ही नहीं रंगों से रंगी दुनिया को मेरी आँखें  ही नहीं ख्वाबों के रंग सजाने को |           * कोंन आएगा ,आखों मे समाएगा रंगों के रूप को जब दिखायेगा रंगों पे इठलाने वालों डगर मुझे दिखावो जरा चल संकू मे भी अपने पग से रोशनी  मुझे दिलों जरा ये हकीकत है कि, क्यों दुनिया है खफा मुझसे मैने देखी … पढ़ना जारी रखें रंगों से रंगी दुनिया – संजय वर्मा ‘दृष्टि’

मज़दूर हूँ मैं – जय नारायण कश्यप

आज नकारते हैं जो , कल दुलारते चलेंगे , क्या लिख गया हूँ मैं , कल संभालते चलेंगे , बज रही हैं तूतियाँ , जिनकी आसमान में , मेरी बुड़बुड़ाहटों को , फिर खंगालते चलेंगे , संस्मरण नहीं कोई , न कोई व्यथा कथा , दूर की कौड़ी नहीं , न कोई कल्पित कथा , ज़िंदगी का सार हैं , फोक फैंक आया हूँ , … पढ़ना जारी रखें मज़दूर हूँ मैं – जय नारायण कश्यप

ज्वार आया – प्रीति सुराना

एक रात चांद का दिल भर आया जब भीड़ में महसूस की उसने तनहाई, चांद को जब तनहा रोता देखा तो सितारों की भी आंख भर आई, अब तो रात भी संग लगी रोने, और हवा ने ये खबर सारी सृष्टि मे फैलाई, तब सागर भी दौड़ा दौड़ा आया, और तभी नासमझ मानव चिल्लाया, देखो समुद्र में ज्वार आया,ज्वार आया …..प्रीति सुराना पढ़ना जारी रखें ज्वार आया – प्रीति सुराना

श्वान , तू महान !! – सौरभ मिश्रा

तुम्हारी नज़रो में विश्वास नज़र आता है । बेखौफ हो जाने का अहसास नज़रआता है ॥ तुम्हारी वफादारी मिसाल बन गई है । हर सभ्यता में वो तो कमाल बन गई है ॥ इन्सानियत भी तुमसे अब सबक ले हर दिन । बेपरवाह खुद की जान से कैसे करते वफ़ा पल – छिन ? इक सवाल मुझको हरदम कचोटता है मन के तारों को वह … पढ़ना जारी रखें श्वान , तू महान !! – सौरभ मिश्रा