जीवनसंगिनी – मनीष कुमार

संग संग चलो मेरी जीवनसंगनी रुको नहीं थको नहीं ओ मेरी हृदयनयनी अपलक नयनों के तार जुड़े हैं तेरे मेरे सांसों को बेजार मत करो मृगनयनी संग संग चलो मेरी जीवनसंगनी आसमान की ऊंचाई से , जीवन की गहराई तक धूपो की अगुवाई से , रात्रि की विदाई तक स्वप्नों की अनुभूति से, हकीकत की सच्चाई तक फूलों की पंखुिड़यों से, काँटों  की चुभन तक … पढ़ना जारी रखें जीवनसंगिनी – मनीष कुमार