मशहूर कवि एवं गीतकार शैलेंद्र पर विशेष

सरल और सहज शब्दों से जादूगरी करने वाले शैलेंद्र का जन्म 30 अगस्त, 1923 को रावलपिंडी में हुआ था. मूल रूप से उनका परिवार बिहार के भोजपुर का था. लेकिन फ़ौजी पिता की तैनाती रावलपिंडी में हुई तो घर बार छूट गया. रिटायरमेंट के बाद शैलेंद्र के पिता अपने एक दोस्त के कहने पर मथुरा में बस गए.   लोकप्रिय गीत आवारा हूँ (श्री ४२०) … पढ़ना जारी रखें मशहूर कवि एवं गीतकार शैलेंद्र पर विशेष

प्रसिद्ध गीतकार कवि प्रदीप पर विशेष

ऐ मेरे वतन के लोगों जरा आँख में भर लो पानी जो शहीद हुए हैं उनकी जरा याद करो कुरबानी   मौत के साए में हर घर है, कब क्या होगा किसे खबर है बंद है खिड़की, बंद है द्वारे, बैठे हैं सब डर के मारे ~ चुपके चुपके रोनेवाले रखना छुपा के दिल के छाले रे ये पत्थर का देश है पगले यहां कोई … पढ़ना जारी रखें प्रसिद्ध गीतकार कवि प्रदीप पर विशेष

हिन्दी और मैथिली के प्रसिद्ध कवि एवं कहानीकार राजकमल चौधरी के जन्मदिवस पर विशेष

अँधेरे में, (गर्म दूध पीती हुई) बिल्ली का चेहरा नहीं देख पाता हूँ, सिर्फ आँखें। हर रात इसी वक्त बिजली कट जाती है।   “… चाय तैयार है, आओ पिएँ…”     एक प्रश्न हजार उत्तर— “मैंने सूरज से पूछा—धरती कब आग का गोला बन जाएगी ? मुझसे सूरज ने पूछा—तुम बरफ-घर में सोये कब तक ?”   ~ राजकमल चौधरी अगर आप भी लिखते … पढ़ना जारी रखें हिन्दी और मैथिली के प्रसिद्ध कवि एवं कहानीकार राजकमल चौधरी के जन्मदिवस पर विशेष

सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन “अज्ञेय”

सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन “अज्ञेय” (7 मार्च, 1911- 4 अप्रैल, 1987) को प्रतिभासम्पन्न कवि, शैलीकार, कथा-साहित्य को एक महत्त्वपूर्ण मोड़ देने वाले कथाकार, ललित-निबन्धकार, सम्पादक और सफल अध्यापक के रूप में जाना जाता है।[1] इनका जन्म 7 मार्च 1911 को उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के कुशीनगर नामक ऐतिहासिक स्थान में हुआ। बचपन लखनऊ, कश्मीर, बिहार और मद्रास में बीता। बी.एस.सी. करके अंग्रेजी में एम.ए. करते समय क्रांतिकारी आन्दोलन से जुड़कर बम बनाते हुए पकडे गये और वहाँ से फरार भी हो गए। सन्1930 ई. के … पढ़ना जारी रखें सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन “अज्ञेय”